BENIPUR VILLAGE

ब्रह्मानंद ठाकुर

मैं बात कर रहा हूँ कलाम के जादूगर रामवृक्ष बेनीपुरी के गाँव बेनीपुर की । बागमती नदी से अपने अस्तित्व रक्षा की लड़ाई हार चूका है यह गाँव । प्रख्यात साहित्यकार, पत्रकार और समाजवादी बेनीपुरी जी का वह मकान, जिसे वे अपना स्मारक कहा करते थे, खिड़की तक जमींदारों का हो चूका है । मकान के सामने निर्मित उनका स्मारक जो कभी जमीन की सतह से 15 फीट ऊँचा था, अब मात्र 5 फीट ऊँचा रह गया है । यह वही बेनीपुर है जहाँ 1934 की राज्य व्यापी भूकंप के बाद बेनीपुरी जी के विशेष अनुरोध पर एक दिन महात्मा गाँधी पधारे थे । जनाढ में उनकी सभा हुई थी । बापू ने वहां के लोगों में ऐसा उत्साह भरा था कि लोग भूकंप की त्रासदी भूलकर जी-जान से पुनर्निर्माण में जुट गये थे ।
बागमती नदी की बाढ़ इस क्षेत्र के लिए अभिशाप बन गयी थी । खेतों में बाढ़, घरों में बाढ़ का पानी, पेड़-पौधों का सुखना और मवेशियों की संक्रामक बिमारियों से मौत आम बात थी । बाढ़ का पानी हटने के बाद जो फसले बोयी जाती थी, वह लहलहा उठती थी । दो नहीं तो एक फसल ही सही, लोग इसी पर संतोष कर लेते थे ।

BENIPUR VILLAGE1980 के बाद बागमती योजना के तहत जनाढ से कटरा तक नदी के दोनों किनारे तटबंध का निर्माण शुरू हुआ और इसी के साथ बेनीपुर समेत महुआ, पटोरी, भरथुआ, जीवाजोर समेत कई गाँव दोनों तटबंध के बीच आ गये । धीरे-धीरे गाँव वीरान होने लगा । आज स्थिति यह है कि पुरा बेनीपुर गाँव विस्थापित हो गया है । पांच-सात परिवारों को छोड़ अब कोई गाँव में नहीं रहता है । राज्य सरकार ने यहाँ के ग्रामीणों के पुनर्वास के लिए वसंत गाँव के चौर क्षेत्र में प्रति परिवार चार से 6 डिसमिल जमीन दिया है । कुछ परिवार वहां बस गये हैं और कुछ शहर की ओर पलायन कर गये ।

मुज़फ्फरपुर जिले के औराई प्रखण्ड अंतर्गत जनाढ पंचायत का गाँव है– बेनीपुर । यहीं 23 दिसम्बर 1899 को रामवृक्ष बेनीपुरी पैदा हुए थे । मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी जानेवाली सड़क पर मुजफ्फरपुर से 28 किलोमीटर पर है जनाढ गाँव । इस जनाढ (तिमुहानी) से बागमती के दायें तटबंध से 2 किलोमीटर पर और मुजफ्फरपुर – सीतामढ़ी रेलवे लाइन पर है बेनीपुरी हाल्ट । इस हाल्ट का नाम बेनीपुरी हाल्ट रखा गया था, जिसे बाद में बदलकर बेनीपुर हाल्ट कर दिया गया । ये रेलवे और भरत सरकार द्वारा बेनीपुरी जी के प्रति उपेक्षा-भाव का एक उदाहारण है । गाँव में जाने पर पता चला की इस हाल्ट से बेनीपुरी जी का नाम हटा दिये जाने से गाँव के लोगों में असंतोष है ।

रामवृक्ष बेनीपुरी का स्मारक ।
रामवृक्ष बेनीपुरी का स्मारक ।

बेनीपुर, हाल्ट से कुछ मीटर पूरब में है, बागमती तटबंध पर अस्थाई पुलिस कैंप, यहाँ बाढ़ के दिनों में होमगार्ड के जवान रहते हैं । शेष दिनों में इस कैंप पर स्थानीय युवकों का दखल रहता है । इसी जगह नाव से बागमती की धारा को पार कर बेनीपुर गाँव आना-जाना होता है । नदी किनारे छोटी-छोट नौकाये बंधी है, जनाढ से बेनीपुर होते हुए आगे काफी दूर तक नदी के बाएं तटबंध से सटी हुई बागमती प्रवाहमान है । जनाढ और बेनीपुर के बीच नदी के उतरी क्षेत्र में कास और गुड़हन का विशाल जंगल है । इसी घनघोर जंगल के बीच गाँव में इक्का-दुक्का घर दिखाई देता है, यही है बेनीपुर गाँव ।

बागमती परियोजना से विस्थापित यहां के लोगों के पुनर्वास के लिए गावं से दो किलोमीटर दक्षिण तटबंध के दायीं तरफ वसंत गांव के चौर में प्रत्येक परिवार को दो से पांच डिसमिल जमीन दी गयी है । इतनी कम जमीन में किसान परिवारों के लिए अपना, अपने मवेशियों के लिए आवासीय व्यवस्था कर पाना मुश्किल है । कुछ संपन्न लोग ही अपने नाम आवंटित आवासीय भू-खंड के बगल में महंगी कीमत पर जमीन खरीदकर मकान बना रहे है । इस हालत में बेनीपुर के करीब 50 परिवार गांव से पलायन कर स्थायी रूप से मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, डुमरा जैसे शहरों और रुन्नीसैदपुर जैसे कस्बाई इलाके में जा बसे है । आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर रहने वाले बेनीपुर के लोगों का खेती-किसानी से विस्थापित होने का दर्द सहज ही महसूस किया जा सकता है । कुछ लोग आज भी अपने गावं में बने हुए हैं, जिनकी संख्या बहुत ही कम है । गावं में आवागमन की समस्या के कारण बेटियों की शादी में बारात गावं में नहीं आती । विवाह का रस्म गावं के बाहर निभाया जाता है ।

brahmanand


ब्रह्मानंद ठाकुर/ बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर के रहने वाले । पेशे से शिक्षक फिलहाल मई 2012 में सेवानिवृत्व हो चुके हैं, लेकिन पढ़ने-लिखने की ललक आज भी जागृत है । गांव में बदलाव पर गहरी पैठ रखते हैं और युवा पीढ़ी को गांव की विरासत से अवगत कराते रहते हैं ।

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