आशीष सागर

यूपी के बुंदेलखंड में खनन का मसला उठना कोई नई बात नहीं है। महोबा का पनवाड़ी अवैध बालू व्यापार का नया ठिकाना बनकर उभरा है। योगी सरकार से पहले महोबा में कभी बालू का अवैध खनन इस तर्ज पर नहीं हुआ। महोबा में पहाड़, बोल्डर,क्रेशर का रोजगार ही चलता रहा है। आए दिन धरना प्रदर्शन होता रहता है । इस बार भी बुंदेलखंड किसान यूनियन के अध्यक्ष विमल शर्मा महोबा में अवैध खनन को लेकर अनशन पर बैठ गए । उन्होंने अवैध बालू डम्प करने वालों पर कार्यवाही की मांग की है। बाँदा में भी बारिश बन्दी के बाद 9 खदाने बन्द है पर चोरी के धंधे में सेंधमारी रुकने का नाम नहीं ले रही ।अतर्रा,नरैनी, मध्यप्रदेश की सीमा से लगे पन्ना आदि में बेधड़क बालू चोरी की जा रही है।

बालू का पेशा करने वाले एक छोटे ट्रैक्टर चालक की मुताबिक अधिकारियों की मिलीभगत से यहां अवैध खनन का खेल चलता है और इसके लिए बाकायदा रेट भी फिक्स होता है । बिना पुलिस के जेब भरे अवैध खनन का खेल चल ही नहीं सकता । उधर बाँदा शहर में ई- रिक्शा पिछले सात माह से अवैध बालू बिना रायल्टी के उठा रहे है । बरसात में भी यह बन्द होने का नाम नहीं ले रही है। वैध, अवैध की इस लूट में बारिश बन्दी के बाद भी बाँदा और महोबा में अवैध खनन किया जा रहा है।

बरसात के समय बन्द खनन को बाधित अवधि कहते है। यूपी में एक जुलाई तो एमपी में 15 जून से नदियों में खनन बन्दी है। किसी भी पट्टेधारक को मशीन या मजदूर से खनन करने की इजाजत नहीं है । सितंबर के अंतिम सप्ताह में पुनः बालू खदान चालू होता है। बावजूद इसके डंपिंग की आड़ में दबंग लोग अधिकारियों की सांठ-गांठ से अवैध खनन कर रहे हैं। वैसे तो चित्रकूट मंडल का महोबा जिला योगी सरकार में सूखाग्रस्त घोषित है लेकिन छोटी नदियों मसलन धसान, चन्द्रावल आदि में बालू की निकासी जेसीबी, एलएनटी मशीनों से धड़ल्ले से की जा रही है। लगातार विरोध-प्रदर्शन के चलते बीते शनिवार को जिलाधिकारी महोबा सहदेव ने अवैध खनन पर कार्यवाही करते हुए 5 खनिज के पट्टे निरस्त किये हैं। ये कार्रवाई सर्वे के आधार पर रायल्टी में अनियमितता पाए जाने पर किए जाने का दावा किया जा रहा है। इन खनन पट्टों को काली सूची में डालते हुए रिकवरी कराए जाने का नोटिस भी जारी हुआ है । इसके अलावा स्योंदी में 1, बराना के 2, लखनियां के 6  और पठा का 1 समेत कुल 10 निजी पट्टों को निरस्त किए जाने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

उधर इस कार्यवाही का बजी खनन के कारोबारियों पर तनिक भी असर नहीं हो रहा है । हाल ये है कि डीएम की इस फौरी सख्ती के 24 घण्टे के भीतर ही महोबा में खनन माफियाओं ने जेसीबी चालक को रविवार रात बराना (पनवाड़ी) में गोली मारकर हत्या कर दी । ऐसा कहा जा रहा है कि खनन के लिए दबाव देने के बाद भी जेसीबी ड्राइवर नहीं गया तो उसकी जान ले ली गई । ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि अगर खनन माफिया बेलगाम होते जा रहे हैं तो फिर डीएम की कार्रवाई का क्या मतलब है । कुछ लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि अधिकारियों ने पहले पैसे लेकर पट्टा किया और जब पहले से बालू डंप करने वाले खनन माफियाओं को नुकसान होने लगा तो दबाव में आकर प्रशासन कार्रवाई करने को मजबूर हुए । ऐसे में सवाल उठता है कि जब जुलाई में बालू खनन पर रोक है तो फिर खनन क्यों हो रहा है और पट्टे क्यों दिए गए । योगी सरकार खनन माफियाओं पर कार्रवाई के लिए बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन सच ये है कि खनन माफियाओं का आतंक पहले से भी बढ़ गया है, लिहाजा अगर इनपर नकेल नहीं कसी गई तो ये लोग नदियों की हत्या के साथ-साथ इंसानों की हत्या यूं ही करते रहेंगे ।


ashish profile-2बाँदा से आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष सागर की रिपोर्ट फेसबुक पर एकला चलो रे‘ के नारे के साथ आशीष अपने तरह की यायावरी रिपोर्टिंग कर रहे हैं। चित्रकूट ग्रामोदय यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र। आप आशीष से ashishdixit01@gmail.com पर संवाद कर सकते हैं।