Author Archives: badalav - Page 97

‘स्टार्ट अप’ से ‘स्टैंड अप’ तक… कहीं वो तमाशबीन ही न रह जाएं?

राजेंद्र तिवारी आलेख में इस्तेमाल सभी फोटो- राजेंद्र तिवारी के फेसबुक वॉल से साभार। अस्सी के दशक में जब आर्थिक ‘ट्रिकल डाउन’ थ्योरी आयी थी और नब्बे के दशक में…
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थर्ड जेंडर ने छेड़ी बराबरी के अधिकार की जंग

शिरीष खरे छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहने वाली प्रिया (बदला नाम) एक ट्रांस जेंडर हैं। उसके अपने सपने थे, वो बाकी बच्चों की तरह स्कूल जाना चाहती थीं, लेकिन…
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सूरज ने चाल बदली, रौशन कर लो अपना पथ

डॉ. दीपक आचार्य दक्षिण गुजरात में एक जिला है डांग, यहां शत-प्रतिशत वनवासी आबादी बसी हुई है और यहां आमजनों के बीच मकर संक्रांति को लेकर जितनी जानकारी है शायद…
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छत्तीसगढ़ के ‘होरी’ की व्यथा कथा कौन सुनेगा?

दिवाकर मुक्तिबोध लालसाय पुहूप। आदिवासी किसान। उम्र करीब 33 वर्ष। पिता - शिवप्रसाद पुहूप। स्थायी निवास - प्रेमनगर विकासखंड स्थित ग्राम कोतल (jmसरगुजा संभाग, छत्तीसगढ़)। ऋण - 1 लाख। ऋणदाता…
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नए साल पर एक ट्रिप जलपुरुष के गांव की

जल पुरुष राजेंद्र सिंह की मेहनत से राजस्थान की रेत में पानी संजय तिवारी 8 जनवरी की सुबह मैं अपने दोस्त के साथ अलवर से तकरीबन 1 घंटे की दूरी…
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‘अल-नीनो’ के बाद ‘ला नीना’, किसानों के शत्रु ‘भाई-बहन’?

फोटो-आशीष सागर दीक्षित के फेसबुक वॉल से सत्येंद्र कुमार यादव भाई ने बिन पानी सब सून किया। अब बहन पानी में सब कुछ डूबो सकती है। इस बार गेहूं काट…
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“कोई मरने से मर नहीं जाता, देख लो वो यहीं कहीं होगा“

हिंदी में नई कहानी के स्तंभ रवींद्र कालिया नवीन कुमार IIMC पास करने के कुछ दिनों की बात है। पत्रकारिता का नया-नया रंगरूट था। नौकरी नहीं करने का फैसला किया…
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गालिब छूटा जीवन का हिसाब…लेकिन ‘कालिया’ सही सलामत है!

हिंदी में नई कहानी के स्तंभ रवींद्र कालिया युवा लेखकों के प्रेरणास्रोत, गालिब छूटी शराब, सृजन के सहयात्री जैसे संस्मरण, खुदा सही सलामत है, 17 रानाडे रोड और एबीसीडी जैसे उपन्यास,…
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नये साल की ‘नव प्रभा’

निशांत जैन  नवल विभा हो, नवल प्रभा हो नवल-नवल कांति आभा हो । नव प्रभात हो, नव विहान हो नव विलास नव ही उत्थान हो । नवल गति हो, नवल…
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मालदा से पूर्णिया तक ‘आग’ पर कोई न सेंके अपनी ‘रोटी’

कहां छिप गए वे सेक्युलर, मानवतावादी... ! पद्मपति शर्मा (फेसबुक वॉल पर) पद्मपति शर्मा मालदा के बाद पूर्णिया ! यह हो क्या रहा है ? क्या सहिष्णुता सिर्फ उस बहुसंख्यक…
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