Author Archives: badalav - Page 2

परब-त्योहार

बदलाव छात्रवृति योजना के लिए प्रस्ताव

शंभु झा दोस्तो,  समाज में सार्थक और सकारात्मक बदलाव के लिए वैल्यू एजुकेशन एक बुनियादी जरूरत है। लेकिन हमने विकास का जो मॉडल अपनाया है, उसमें समाज के बहुत बड़े…
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मेरा गांव, मेरा देश

सवालों की पटरी, ‘बुलेट’ का बुलंद सपना

राधे कृष्ण देश में पहली बुलेट ट्रेन की नींव सही मायने में न्यू इंडिया की आधारशिला रखी गई है । ये कहना है देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पत्नी…
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मेरा गांव, मेरा देश

हिंदी दिवस और कोपेनहेगन 

कोपेनहेगन सच्चिदानंद जोशी 7 सितंबर 2017 को कोपेनहेगन में था। थोड़ा तफरी करने के इरादे से विश्व प्रसिद्ध लिटिल मर्मेड की प्रतिमा तक चला गया। वो जगह सचमुच बहुत सुंदर…
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सुन हो सरकार

सरकार, रोजी-रोटी का जरिया बने हिंदी

ब्रह्मानंद ठाकुर आज हिन्दी दिवस है। राजभाषा हिन्दी के विकास के बड़े-बड़े दावे और वादे किए जा रहे हैं। बाबजूद इसके आज अपने ही घर में हिन्दी कितनी उपेक्षित और पददलित…
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मेरा गांव, मेरा देश

साइनबोर्ड की ग़लतियां सुधारने वाला हिंदी का पहला सेवक

ब्रह्मानंद ठाकुर यह गौरव मुजफ्फरपुर को हासिल है, जहां अयोध्या प्रसाद खत्री ने भारतेन्दु युग  (1850-1900) में हिन्दी साहित्य में आधुनिक युग की शुरुआत की। यह खत्रीजी के ही सतत…
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मेरा गांव, मेरा देश

टीवी पत्रकारिता की सबसे शर्मनाक तस्वीर !

टीवी पत्रकारिता से जुड़े 10 साल हो गए हैं । कई कमियों का बावजूद ये पेशा मुझे सबसे बेहतर लगता है तभी में आज तक इसके साथ बना हुआ हूं…
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मेरा गांव, मेरा देश

कल रखी जाएगी मोदी के सपनों की आधारशिला !

फोटो- राधे कृष्ण, वरिष्ठ पत्रकार कल, यानी 14 सितंबर 2017, हिंदुस्तानियों के लिए ऐतिहासिक पल होगा । भले ही भारतीय रेल इस वक्त पटरी से उतर गई है लेकिन कल…
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मेरा गांव, मेरा देश

आपकी पत्नी के खाते में बैंक वालों का डाका पड़ा क्या?

विकास मिश्रा मेरी पत्नी का सेविंग अकाउंट था इंडियन ओवरसीज बैंक में। गुप्त खाता। जिसमें जमा रकम का मुझे घर में लिखित कानून के मुताबिक पता नहीं होना था, लेकिन…
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मेरा गांव, मेरा देश

लेखक और पत्रकार सबसे आसान शिकार हैं- उदय प्रकाश

गौरी लंकेश की हत्या से देश स्तब्ध है। पत्रकार-साहित्यकार वर्ग सहमा हुआ है। आखिर अभिव्यक्ति की आज़ादी के मतलब क्या हैं? हिंसा और उन्माद के इस दौर में कैसे अपनी…
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मेरा गांव, मेरा देश

पूरे समाज को हर बच्चे का खयाल रखना होगा

मृदुला शुक्ला बच्चों के साथ घटती तमाम घटनाओं में हम आसानी से किसी न किसी को दोष देकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते हैं। घर, स्कूल, सड़कें, अस्पताल, रेलवे…
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