Author Archives: badalav - Page 2

मेरा गांव, मेरा देश

हम बदलेंगे और जमाना बदलेगा – IPS विकास कुमार

पुलिस हमारी सुरक्षा करती है, एक अच्छे समाज के लिए एक अच्छे सुरक्षातंत्र का होना बेहद ही जरूरी है। ये अलग बात है कि हमारे देश का पुलिस-तंत्र हमेशा संदेह…
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बिहार/झारखंड

समय ‘वाचाल’ है और कवि ‘मौन’!

पशुपति शर्मा 'समय वाचाल है' इसी शीर्षक से आजतक में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार साथी देवांशुजी का काव्य संग्रह हाथ में आ गया है। इस बार 'साहित्य आजतक' में सम्मिलित होने…
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बिहार/झारखंड

‘तालाबंदी’ से संकट में एशिया के सबसे बड़े पशु मेले का वजूद

फोटो साभार- ईटीवी पुष्यमित्र एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला यानी सोनपुर मेला आज बंद है। दिलचस्प है कि मेले के सभी दुकानदारों ने यह बंदी खुद की है ।…
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बिहार/झारखंड

पूंजीपति रहेंगे मस्त तो किसान रहेंगे पस्त

ब्रह्मानंद ठाकुर तमिलनाडु के किसानों का आंदोलन और मध्य प्रदेश के मंदसौर में अपनी मांगों को लेकर आंदोलनकारी किसानों पर पुलिसिया जुल्म के बाद तमाम किसान संगठन एक मंच पर…
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चौपाल

कैसे बचाएं हम अपनी बेटियों को ?

अजीत अंजुम बहुत हिम्मत जुटाकर आज ये लिखने बैठा हूं। अभी भी शब्द और ऊंगलियां साथ नहीं दे रही हैं। दिल्ली में दुष्कर्म की शिकार हुई सात साल और डेढ़…
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आईना

दिल्ली को गैस चैंबर में रहना पसंद है ?

फोटो साभार- एडवोकेट प्रताप राठौर । दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण अपने खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है । बर्दाश्त करने की क्षमता से कई गुना प्रदूषण बढ़ जाने से दिल्ली सरकार…
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चौपाल

पैराडाइज पेपर्स: यहां सत्ता का झगड़ा नहीं है, सब शून्य में समाहित हैं!

इंडियन एक्सप्रेस ने नोटबंदी डे से पहले किया बड़ा खुलासा । कर-स्वर्ग के स्वामियों को धरती के अज्ञानियों का एक पैग़ाम । कर के स्वर्गलोक का खुफिया तोरण द्वार सज़ा…
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परब-त्योहार

सामा खेले गेलिअइ भइया के अंगना हे!

ब्रह्मानंद ठाकुर सामा चकेवा बिहार का एक प्रमुख लोक पर्व है जो कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष में चतुर्थी तिथि से पूर्णिमा तक मनाया जाता है। यह पर्व मिथकीय कथाओं…
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चौपाल

मजदूरों की सबसे बड़ी क्रांति के सौ बरस

ब्रह्मानंद ठाकुर आज हम चांद और मंगल पर घर बसानों की सोच रहे हैं, लेकिन जो धरती पर हैं उनकी सुध नहीं ले रहे। आखिर दुनिया में अमीर और गरीब…
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बिहार/झारखंड

संवाद की कोशिश में एक महिला का ‘सरेंडर’!

सुदीप्ति एक ही ससुराल है अपना तो। अब मायके से ज्यादा अपना। भई हम सुतली बम में सच्ची यकीन नहीं करते। जैसे हैं वैसे को बाहें फैला अपनाया है लोगों…
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