Author Archives: badalav - Page 2

मेरा गांव, मेरा देश

‘असंभव के विरुद्ध’ एक आवाज़ का यूं गुम हो जाना

कल्पेश जी को भावभीनी श्रद्धांजलि पुष्य मित्र भास्कर के समूह संपादक कल्पेश याग्निक के निधन से पूरा मीडिया जगह स्तब्ध है। हर कोई अपने अपने तरीके से कल्पेश जी को…
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मेरा गांव, मेरा देश

सोशल मीडिया के ‘ब्लैकहोल’ में गुम होता युवावर्ग

डा. सुधांशु कुमार आज जिस प्रकार सोशल मीडिया पर खासकर किशोर और युवावर्ग अपनी आंखें गड़ाए रहते हैं , यह उनके कैरियर के लिए किसी चुनौती से कम नहीं ।…
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गांव के नायक

जेपी आंदोलन का ‘निर्मल’ सिपाही

पुष्यमित्र जेपी आंदोलन का नाम लेते ही 70 के दशक में युवा रहे आजकल के नेता अपने संघर्षों की कहानियां सुनाने से खुद को रोक नहीं पाते । आखिर सुनाएं…
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बिहार/झारखंड

वीरेन नंदा की किस्सागोई पार्ट 4-5

सांकेतिक चित्र वीरेन नन्दा किस्सागोई के के तीसरे अंक में आपने पढ़ा किस तरह कवि- कहानीकार दोस्तों ने शहर के एक मशहूर पूड़ी-जलेबी की दुकान में छक कर पूड़ी-जलेबी खाने…
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मेरा गांव, मेरा देश

फ़सलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में अधिकतम घपलेबाजी

ब्रह्मानंद ठाकुर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने पिछले दिनों खरीफ  सीजन की फ़सलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की। इस मौके पर उन्होंने  कहा-2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान…
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बिहार/झारखंड

छपरा की बेटी का दर्द … ओ री चिड़ैया

अनीश कुमार सिंह मैं बिहार के छपरा की बेटी हूं। मेरा दम घुट रहा है। एक-एक सांस मुझ पर भारी पड़ रही है। उस मनहूस दिन को याद करके मैं…
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चौपाल

वीरेन नंदा के किस्से पार्ट-3

सांकेतिक चित्र वीरेन नंदा किस्सागोई के पिछले अंक में आपने पढ़ा कि कैसे दो दोस्त, जो साहित्यकार भी हैं, घर से रिक्शे पर सवार होकर बाजार निकले और उनका हर…
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महानगर

पूर्णिया में 8 जुलाई को रवि भूषण की फिल्म का प्रीमियर

बदलाव प्रतिनिधि नवोदय विद्यालय एल्युमिनी एसोसिएशन बिहार की ओर से पूर्णिया में 8 जुलाई को फिल्म  “लाइफ ऑफ एन आउटकास्ट ” का प्रीमियर रखा गया है।  इस फिल्म में मुख्य…
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मेरा गांव, मेरा देश

पटना में 8 जुलाई को माहवारी पर बातें कीजिए खुलकर

पुष्यमित्र बिहार डॉयलॉग का तीसरा सत्र फाइनल हो गया है। विषय है, माहवारी, पीरियड्स, मासिक धर्म। मुद्दा है, इस मसले पर बातें हों. खूब सारी बातें हों. इसलिए हमने रविवार…
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माटी की खुशबू

‘लाल परी’ की चोरी और एक रंगकर्मी

अनिल तिवारी अनिल तिवारी के रंग अनुभवों की ये सीरीज बदलाव पर बीच-बीच में बाधित होती रही है। निजी व्यस्तताओं की वजह से तारतम्यता बना कर नहीं रख पाते हम,…
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