Author Archives: badalav - Page 2

गांव के नायक

विनोद दुआजी, तुस्सी ग्रेट हो!

नदीम एस अख़्तर  कहते हैं जो पेड़ से फल से जितना लदा होता है, वो उतना ही झुका होता है. एक दफा फिर जिंदगी में इसे अपने सामने घटते देखा.…
और पढ़ें »
आईना

देहरादून में सृजन का सादगी भरा साहित्य उत्सव

प्रियदर्शन साहित्य समारोह अक्सर अपनी भव्यता और भटकावों में मुझे अरुचिकर लगते रहे हैं। इन समारोहों में साहित्य और विचार पीछे छूट जाते हैं और ग्लैमर और चकाचौंध का शोर…
और पढ़ें »
आईना

नए साल पर पठन-पाठन का चैलेंज

सोशल मीडिया पर पिछले दो दिनों से शुभकामनाओं का सिलसिला चल रहा है, ऐसे में एक पोस्ट पर नज़र गई। वरिष्ठ पत्रकार प्रियदर्शन जी की ये पोस्ट नए साल में…
और पढ़ें »
परब-त्योहार

गए साल को चरण स्पर्श

नीलू अग्रवाल विदा, विदा, विदा...अलविदा। अब मिलेंगे नहीं कभी नहीं हमें है पता। हँसते हुए, फिर भी देते हैं विदा। तुम जाओ यही नियति है। वह आएगा कुनकुनाता, गुनगुनाता चुलबुलाता…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

सुधीर जी आपका ये कदम ‘भलु लगद’

कार्टूनिस्ट भाटी के फेसबुक वॉल से हर इंसान के जीवन में एक ना एक फुंसुख वांगड़ू जैसा किरदार जरूर होता है जो होता जीनियस है पर उसके आस-पास के सीमित…
और पढ़ें »
परब-त्योहार

देहरादून में साहित्य का समारोह और कुछ यादें

सुमन केशरी इस साल देहरादून लिट फ़ेस्ट में भाग लेने का सुयोग हुआ। शुक्रिया गीता गैरोला…शुक्रिया समय साक्ष्य! देहरादून लिट फ़ेस्ट इस मायने में बेहद महत्त्वपूर्ण आयोजन रहा कि इसमें…
और पढ़ें »
चौपाल

‘सुशासन बाबू का फ़ैसला गांधीद्रोह से कम नहीं’

पहली बार जिस खपरैल में गांधी का स्कूल शुरु हुआ था ब्रह्मानंद ठाकुर बिहार सरकार के एक फैसले को लेकर पिछले दिनों अखबारों में 'बुनियादी विद्यालयों को खत्म करने पर…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

पारदर्शी कैबिनेट में गांधी का चरखा और समय का चक्र

धीरेंद्र पुंडीर “ अगर हमने गांधी को विश्व की शांति के लिए एक मसीहा के रूप में जन-मन तक स्थिर करने में सफलता पाई होती तो United Nations का General…
और पढ़ें »
परब-त्योहार

मेघदूत में ‘राम की शक्तिपूजा’

संगम पांडेय कथक नृत्यांगना प्रतिभा सिंह निर्देशित प्रस्तुति ‘राम की शक्तिपूजा’ में सबसे ज्यादा जो चीज दिखती है वो है मनोयोग। उनके नाट्यग्रुप ‘कलामंडली’ में शास्त्र-निपुण कलाकारों से लेकर दिल्ली…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

जाति न पूछो अपराधी की…

राकेश कायस्थ अगर लालू यादव केवल इसलिए दोषी करार दिये गये क्योंकि उनका नाता पिछड़े समाज से हैं तो फिर ए.राजा और कनिमोड़ी टू जी में कैसे छूट गये? हर…
और पढ़ें »