Author Archives: badalav - Page 2

बिहार/झारखंड

सुकराती पर्व की सोन्ही यादें और बैलों की घंटी का संगीत 

ब्रह्मानंद ठाकुर इस दुनिया मे चिरंतन ,शाश्वत और अपरिवर्तनशील कुछ भी नहीं है। वस्तुजगत का कण - कण परिवर्तनशील है। मूल्य, मान्यताएं, आस्था, धर्म, विश्वास, नीति-नैतिकता और परम्परा भी इस…
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मेरा गांव, मेरा देश

फिल्म से पहले पिता ने क्यों किया पीहू का स्टिंग ऑपरेशन

विनोद कापड़ी पीहू के माता-पिता रोहित विश्वकर्मा और प्रेरणा शर्मा की सहमति मिलने के बाद मैंने तय किया कि अब मुझे पीहू से रोज़ मिलना चाहिए। पीहू से दोस्ती बनाने…
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आईना

मिस टनकपुर से बेबी पीहू तक, एक जिद की जीत

विनोद कापड़ी कहानी और पीहू दोनों मिल चुकी थी। प्रोड्यूसर मिलना बाक़ी था। एक और बेहद मुश्किल काम। मुंबई में अलग-अलग स्टूडियोज़ और प्रोड्यूसर से मिलना-बात करना शुरू किया। जो…
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परब-त्योहार

तब की दिवाली, अब का ‘दिवाला’

ब्रह्मानंद ठाकुर आज घोंचू भाई जब मनकचोटन भाई के दालान पर पहुंचे तो मनसुखबा दिवाली मनाने के लिए जरूरी सामान का लिस्ट बना रहा था। घोंचू भाई उसकी बगल में…
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आईना

नन्हीं पीहू से प्यार और विनोद कापड़ी का पागलपन

विनोद कापड़ी फ़िल्म रिलीज़ होने में अब कुछ दिन बाक़ी हैं।अब पीहू फ़िल्म से जुड़ी कुछ कहानियाँ। सबसे पहले कैसे आया आइडिया और पहली बार कब मिली पीहू ?  …
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सुन हो सरकार

उग्र हिंदुत्व के पैरोकारों का कुछ धर्म-ईमान भी बचा है?

राकेश कायस्थ के फेसबुक वॉल से साभार मैं आरएसएस को एक अतार्किक गैर-जिम्मेदार, षडयंत्रकारी और विभाजनकारी विचारधारा मानता हूं। यह बात विचारधारा को लेकर है, व्यक्तियों को लेकर नहीं। व्यक्तिगत…
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गांव के नायक

झूठ की फैक्ट्री और सच के आईने में नेहरू

आलोक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से साभार ‘इंडिया टुडे’ के पूर्व पत्रकार पीयूष बबेले ने जवाहरलाल नेहरू पर शानदार किताब लिखी है। तीन महीने पहले जब वे पांडुलिपि के साथ…
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गांव के रंग

महिलाओं की सेहत, सैनेटरी नैपकिन और जागरूकता के ‘ढाई आखर’

टीम बदलाव बिहार के औरंगाबाद में गरीब और जरूरत मंदों के लिए शिक्षा की अलख जगा रहे ढाई आखर फाउंडेशन ने एक और पहल की है । ढाई आखर की…
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मेरा गांव, मेरा देश

किसानों के ‘हमदर्द’ मंत्रीजी का गणित गड़बड़ है

ब्रह्मानंद ठाकुर आज मनकचोटन भाई के दलान पर खूब गहमागहमी है।  बटेसर, परसन कक्का , चुल्हन भाई, धरीच्छन,  बिल्टू उस्ताद, भगेरन, बदरुआ, हुलसबा और धनेसरा सब दलान में जम गया…
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मेरा गांव, मेरा देश

‘मानवता के लिए वैश्वीकरण सबसे बड़ा ख़तरा’

वैश्वीकरण के आर्थिक परिणामों और तकनीकी परिवर्तन के प्रभाव को सभी गहराई से समझते हैं। कारखानों के स्वसंचालन ने पारम्परिक उत्पादन से जुड़े रोजगार को पहले ही खत्म कर दिया…
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