Author Archives: badalav - Page 127

गाँवन के गुनहगार अपने, आ कोसेला गाँव के

डॅा० जयकान्त सिंह 'जय' हमार गतर-गतर गँवई गरिमा के गवाही देला। रोंआँ-रोंआँ ओकरे रिनी (ऋणी) बा। हमार मन-मिजाज आ दिल-दिमाग हर घरी ओही गँवई गंध-सुगंध में बोथाइल-गोताइल रहेला। नोकरी-चाकरी के…
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चौपाल

सरकारी स्कूल- केवल ढोल पीटने से ढोल फट जाएगा

मृदिक व्रतेश सरकारी और गैर-सरकारी, दो स्कूली दरबार। यहां व्यवस्था-अव्यस्था एवं सुविधा-असुविधा के अंतर का विभाजक बीज बोकर एक अद्भुत खेल खेला जा रहा है। यहां उपभोक्ता को लुभाने के…
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खुश हो लो… सड़क प्रवीण तोगड़िया के नाम तो नहीं की

देवांशु झा के फेसबुक वॉल से औरंगजेब रोड पर संग्राम छिड़ा है। भला सड़क का नाम औरंगजेब से बदल कर एपीजी अब्दुल कलाम क्यों किया जा रहा है? इसमें मुसलमानों…
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कोसी तो मोदी के ‘मौन’ पर सवाल करती है!

प्रधानमंत्री के हालिया बिहार दौरे को 10 दिन से ज़्यादा वक़्त गुजर गया है। इस दौरान मोदीजी के भारी भरकम पैकेज पर तो काफी शोर मचा लेकिन 18 अगस्त, कोसी…
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किस कोठरी में बंद है कोठारी आयोग की रिपोर्ट?

एपी यादव की रिपोर्ट देश में दिन दिनों समान शिक्षा की बहस चल रही है । अमीर-गरीब सभी के बच्चे एक साथ, एक कक्षा में एक साथ बैठें, एक जैसी…
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पब्लिक स्कूल से कहां पिछड़ गए सरकारी स्कूल ?

डॉ विनोद कुमार उत्तर प्रदेश में प्राइमरी स्कूलों की बदहाली के सिलसिले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले ने मानो उत्तर प्रदेश की उनींदी शिक्षा व्यवस्था को झकझोर कर जगा दिया…
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स्कूल में समाजवाद… अइयो ज़रा-ज़रा हौले-हौले

राधे कृष्ण समान शिक्षा को लेकर देश की आज़ादी के बाद से ही मांग उठती रही है। सरकारें- वो केंद्र की हों या राज्यों की- कम से कम सैद्धांतिक तौर…
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गुरु कहे- ‘घंटालों’ से निपटें, तब तो बात बने

शरत कुमार इलाहाबाद हाई कोर्ट का सरकारी स्कूलों की दशा पर आया निर्णय ऐतिहासिक है। सरकारी स्कूलों की दुर्दशा का कारण नीति निर्माताओं, अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों का भ्रष्ट तंत्र माना जा…
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मुझे दुलराता है, मेरे गांव का स्टेशन

शंभु झा मेरा गांव रेलवे लाइन के किनारे है। गांव की ज़मीन पर ही रेलवे स्टेशन बसा है। स्टेशन बसा है, जैसे घर बसता है। स्टेशन हमेशा मुझे घर जैसा…
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