बीएसपी प्रमुख मायावती को गुलदस्ता देते एसपी प्रमुख अखिलेश यादव।

मुलायम की कुर्सी छिन जाने के बाद गुस्साए समर्थकों ने मायावती पर हमला कर दिया था जिसे पूरा देश गेस्ट हाउस कांड के नाम से जानता है । इस हमले के बाद कभी सरकारी कार्यक्रम में भी मायावती और मुलायम साथ नजर नहीं आए… अब 25 साल बाद जब कड़वाहट की बर्फ पिघली तो मायावती-अखिलेश के रूप में नया गठबंधन सामने आया है । और अब दोनों के बीच 36 का आंकड़ा खत्म होकर 38-38 सीटों पर गठबंधन के रूप में बदल गया है ।

25 साल पहले मुलायम सिंह ने 1992 में समाजवादी पार्टी का गठन किया । इसके एक साल बाद हुए चुनाव से पहले बीएसपी के साथ एसपी ने रणनीतिक समझौते के तहत गठबंधन किया । मुलायम सिंह के नेतृत्व में सरकार बनी । दोनों पार्टियों ने बीजेपी को करारी शिकस्त दी. 1995 तक सरकार चली। इसी बीच कई मुद्दों पर कांशीराम और मुलायम सिंह के रिश्ते में कड़वाहट आ गई। कांशीराम ही बीएसपी के संस्थापक थे और उनके कहने पर मायावती ने एसपी से अपना गठबंधन तोड़ दिया और इस वजह से मुलायम सिंह यादव की सीएम की कुर्सी छिन गई थी । लेकिन अब केंद्र की बीजेपी सरकार से सत्ता छिनने के लिए ये गठबंधन हुआ है । इस गठबंधन रूप इस मिसाइल का टेस्ट हुआ था गोरखपुर-फूलपूर लोकसभा उप चुनाव में । जीत के बाद मिली संजीवनी ने ऐसा गणित बैठाया किया कि 12 जनवरी 2019 को एसपी-बीएसपी के बीच फाइनल गठबंधन हो गया ।

फूलपुर और गोरखपुर में बिना गठबंधन मिली जीत के बाद बीजेपी हमेशा गेस्ट हाउस कांड मुद्दे को उठाती रही है । लेकिन अंग्रेजी में एक कहावत है First let the address elephant in the room…. इसका मतलब है जो सबसे विवादित मुद्दा है उसका सबसे पहले ज़िक्र कर दो तो सारे एजेंडे की हवा निकल जाएगी। मायावती ने यही किया । बीजेपी के नेता और उनके समर्थकों ने यही सोचा था कि लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का ज़िक्र कर मायावती और अखिलेश को घेरा जाएगा लेकिन मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में ही ये कह दिया कि उन्होंने देशहित में इस कांड को भूलने और आगे बढ़ने का फैसला किया है । ये भी याद दिलाया कि उस वक्त दोनों दलों के आगे बीजेपी की कोई हैसियत नहीं बची । एसपी के साथ गठबंधन के लिए मायावती ने उन दिनों को याद भी किया जब मुलायम और कांशीराम की जोड़ी ने यूपी में एक नया इतिहास रचा था ।

बीजेपी डर की वजह से गठबंधन बनाने की बात कह रही है। शायद एक साथ आने के पीछे एक बड़ी वजह भी है क्योंकि, 2014 लोकसभा और 2017 विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों की बुरी हार हुई थी। बीजेपी का जनाधार लगातर बढ़ते जा रहा था । ऐसे में उससे निपटने के लिए शायद दोनों पार्टियों के पास गठबंधन ही विकल्प बचा था । प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीएसपी प्रमुख मायावती ने ऐलान कर दिया कि एसपी-बीएसपी का गठबंधन अब 38 सीटों पर लोकसभा चुनाव में एक साथ मिलकर उतरेंगी । 2 सीटें सहयोगी दलों के लिए और दो सीटों पर कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया गया है।

12 जनवरी 2019, गठबंधन का ऐलान करती मायावती, साथ में अखिलेश यादव मौजूद।

बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने ये भी साफ कर दिया कि यूपी में कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा । मायावती ने कांग्रेस और बीजेपी को एक जैसी पार्टी करार दिया । इमरजेंसी की याद दिलाई, बोफोर्स घोटाले का भी जिक्र किया । साथ ही ये भी कहा कि कांग्रेस ने सीबीआई का इस्तेमाल कर उन्हें परेशान करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और बीजेपी भी वही कर रही है। हमीरपुर खनन मामले की जांच में अखिलेश यादव के नाम को घसीटने पर और गठबंधन को और मजबूती देने के लिए मायावती ने कहा कि खनन मामले में अखिलेश के साथ नाइंसाफी बीएसपी बर्दाश्त नहीं करेगी । बीएसपी अखिलेश यादव के साथ खड़ी है। मायावती ने बीजेपी पर अखिलेश की इमेज खराब करने का भी आरोप लगाया । वहीं अखिलेश ने बीजेपी नेताओं की टिप्पणियों को याद करते हुए अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि मायावती का अपमान उनका अपमान होगा ।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच एक दिलचस्प सवाल ये भी था कि क्या अखिलेश मायावती को पीएम उम्मीदवार देखना चाहते हैं । इस सवाल पर अखिलेश ने कुछ साफ-साफ नहीं कहा.. लेकिन इशार किया कि अगला पीएम यूपी से ही होगा । यानी मायावती के सामने अखिलेश ने खुलकर ये नहीं कहा कि मायावती को वो पीएम उम्मीदवार के तौर पर देखते हैं। साथ ही अजीत सिंह को लेकर भी कुछ साफ साफ नहीं कहा । लोकसभा चुनाव के लिए एसपी-बीएसपी की गणित में अजीत सिंह का जिक्र कहीं नहीं था । हालांकि सहयोगी दल के लिए 2 सीटें छोड़ दी गई हैं । वहीं अमेठी और रायबरेली सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारने का भी फैसला लिया गया है। यही नहीं साथ ही अखिलेश ने बीजेपी की यूपी सरकार पर भी हमला बोला और जातिवाद करने का गंभीर आरोप लगाया । जिसका जवाब दिल्ली के रामलीला मैदान से सीएम योगी ने दिया और कहा कि ये गठबंधन डर की वजह से हुआ है। दावा किया कि बीजेपी सरकार की कोई योजना जातिगत नजरिये से लागू नहीं की जाती है, हर वर्ग को लाभ मिलता है।

गठबंधन के ऐलान के बाद एसपी-बीएसपी के कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न। देवरिया के सलेमपुर में सड़कों पर निकले।

बहरहाल समाजवादी पार्टी के अखिलेश युग में बीएसपी के साथ गठबंधन हुआ है । मायावती इसे नई क्रांति बता रही हैं। कार्यकर्ताओं में उत्साह है। गठबंधन के ऐलान के बाद सड़कों पर एसपी-बीएसपी कार्यकर्ताओं का उत्साह दिखा। बुआ-बबुआ के स्वागत में लखनऊ की सड़कें पोस्टरों से भरी है । ‘सपा-बसपा आई है. नई क्रांति लाई है’ जैसे नारे लिखे हैं । पार्टी में मुलायम और शिवपाल का दबदबा खत्म हो चुका है । शिवपाल अलग पार्टी का गठन कर चुके हैं । अखिलेश और मायावती के सामने बीजेपी की चुनौती है। दोनों ने पिछले पांच सालों में जनाधार खोए हैं। अब गठबंधन के सहारे पुरानी जमीन तैयार करने की कोशिश है ।


एस के यादव, टीवी पत्रकार

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