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नरेंद्र लाल शाह- रिटायरमेंट के बाद बड़ी पारी।

गैरसैंण से बी डी असनोड़ा की रिपोर्ट

उत्तराखण्ड की गैरसैंण तहसील के धुनारघाट में जन्मे नरेंद्र लाल शाह बचपन से ही क्रिकेट की दीवाने थे। जब भी मौका मिलता हाथ में गेंद और बल्ला लेकर क्रिकेटर बनने का सपना बुनने लगते। ये वो समय था जब उत्तराखण्ड अलग राज्य नहीं था। उत्तर प्रदेश के एक अति पिछड़े इलाके के रूप में इस पहाड़ी हिस्से की पहचान थी। न खेल के बड़े मैदान थे, न सुविधाएं और न ही कोई मार्गदर्शक था। खेत, सड़क और रास्तों पर खेलते ही बचपन बीत जाया करता था।

सपना क्रिकेटर बनने का और चिंता रोजी-रोटी की। क्रिकेट करियर नहीं बना तो नौकरी करनी पड़ी। क्रिकेट का कीड़ा मन में ऐसी जड़ें जमा चुका था कि नौकरी के दौरान भी कुलबुलाता रहता था। नरेंद्र जब भी छुट्टी में गांव आते, तो उस जगह पहुंच जाते जहां बच्चे क्रिकेट खेलते। इसी शौक के चलते करीब 25 साल पहले अपने पिता की याद में स्वर्गीय बांके लाल शाह क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया। गैरसैंण में आयोजित ये क्रिकेट प्रतियोगिता इतनी हिट हुई कि इलाके के खिलाड़ियों को हर साल इसका इंतज़ार रहने लगा।

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गुरू का गौरव। जिनको ट्रेनिंग दी, उन्हें कामयाबी के शिखर पर देखने की ख्वाहिश।

नरेंद्र पहाड़ के खिलाड़ियों के लिये इससे भी ज़्यादा कुछ करना चाहते थे। इसके लिये रिटायरमेंट तक इंतज़ार करना पड़ा। जब रिटायर हुये तो खुद को पूरी तरह क्रिकेट के लिये समर्पित कर दिया। गैरसैंण में जो प्रतियोगिता आयोजित होती थी वो देहरादून में ऑल इंडिया लेबल पर होने लगी। लिटिल मास्टर क्लब भी गैरसैंण से देहरादून पहुंच गया।

देहरादून से नरेंद्र लाल शाह के लिटिल मास्टर क्लब ने एक से बढ़कर एक खिलाड़ी दिए। स्नेह राणा जैसी अंतर्राष्ट्रीय स्टार लिटिल मास्टर क्लब की ही देन है। नरेंद्र और उनकी पत्नी किरन शाह ने स्नेह पर इतनी मेहनत की कि एक गरीब किसान की बेटी खेत खलिहान से भारतीय टीम में पहुंच गयी। इसके साथ नरेंद्र के क्लब से अंडर 19 के छह खिलाड़ी निकले। नॉर्थ जोन के लिये एक खिलाड़ी का चयन हुआ। गैरसैंण के रिखोली की रेखा ढौंडियाल बीपीएल परिवार से आती हैं। नरेंद्र ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुये लिटिल मास्टर क्लब में प्रशिक्षण दिया। रेखा अब पंजाब की अंडर 19 टीम का हिस्सा हैं।

दोनों पति-पत्नी लिटिल मास्टर क्लब में पहाड़ की क्रिकेट प्रतिभाओं को तराश रहे हैं। किरन क्लब का पूरा कामकाज देखती हैं तो नरेंद्र टीम को प्रतियोगिताओं में लेकर जाते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि नरेंद्र को अपने जेब से ही पैसे खर्च करने पड़ते हैं लेकिन क्रिकेट के प्रति उनके जुनून के आगे ये बहुत छोटी बात है।

इस हौसले के कद्रदान हैं लिविंग लिजेंड सचिन तेंदुलकर।
इस हौसले के कद्रदान हैं लिविंग लिजेंड सचिन तेंदुलकर।

क्रिकेट के लिविंग लिजेंड सचिन तेंदुलकर से मुलाक़ात को नरेंद्र जीवन का सबसे यादगार पल बताते हैं। अपने संन्यास के बाद सचिन मसूरी आये थे। सचिन को जब नरेंद्र लाल शाह के बारे में पता चला कि कैसे सीमित संसाधनों में वो क्रिकेट क्लब चला रहे हैं तो उन्हें मिलने बुलाया। नरेंद्र क्लब के प्रशिक्षुओं को लेकर सचिन से मिले, करीब पौन घंटे तक नरेंद्र और उनके प्रशिक्षुओं की बातचीत हुई। सचिन की सादगी और विनम्रता से नरेंद्र और उनके साथी अभिभूत हो गये।


उत्तराखंड के गैरसैंण के निवासी बी डी असनोड़ा  । लंबे अरसे से वो गांव से जुड़े मुद्दों को अलग-अलग मंचों से उठाते रहे हैं।