महानगरीय जीवन में परिवार सिकुड़ता जा  रहा है और रिश्तों में दूरिया बढ़ती जा रही हैं। आलम ये है कि आज ना अपने लिए वक्त है ना अपनों के लिए। रोजाना की भागमभाग ऐसी है कि हमें पीछे मुड़कर देखने का भी वक्त नहीं है कि कहीं कोई अपना छूट तो नहीं रहा। जरा सोचिए हम जिनकी उंगली पकड़कर चलना सीखे, जिनके कंधे पर चढ़कर अपने सपने बुने। जिनकी सीख और समझ की बदौलत हम दुनिया में अपना एक मुकाम हासिल करने में कामयाब हुए। फिर भी उम्र की ढलान पर जब उनको हमारी सबसे ज्यादा जरूरत होती है तो हमारे पास उनके लिए वक्त नहीं रहता या यूं कहें कि हम वक्त निकाल पाने की ईमानदार कोशिश ही नहीं करते।

इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर टीम बदलाव ने विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस की पूर्व संध्या यानी 30 सितंबर को वरिष्ठ नागरिकों के साथ संवाद स्थापित करने की एक कोशिश की है। बदलाव  और ढाई आखर फाउंडेशन ने ‘कल और आज – कुछ अपनी कहें, कुछ हमारी सुनें’ आयोजन के जरिए हमारे आपके मन पर एक दस्तक की पहल की है। ये कार्यक्रम गाजियाबाद के वसुंधरा सैक्टर 11 के विद्या बाल भवन पब्लिक स्कूल के प्रांगण में होगा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर ग़ाज़ियाबाद के एसएसपी वैभव कृष्ण को आमंत्रित किया गया है। वहीं विशिष्ट अतिथि के तौर पर दिल्ली के सीएम ऑफिस में डिप्टी सेक्रेटरी प्रशांत कुमार ने कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति दे दी है। विद्या बाल भवन पब्लिक स्कूल के चेयरमैन डॉ सतवीर शर्मा कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे।

कुछ लोग अपने बुजुर्ग माता-पिता को वृद्धा आश्रम के हवाले कर सुकून महसूस करते हैं तो कुछ लोग पैसे खर्च कर केयर टेकर के जरिए अपने बुजुर्गों की देखरेख की जिम्मेदारी से मुक्त हो लेते हैं। क्या हमने कभी सोचा है कि आखिर हमारे अपने उम्र बढ़ने के साथ क्या सोचते हैं? उनकी इच्छा क्या होती है? क्या हम कभी ये जानने की कोशिश करते हैं कि वो हमसे क्या चाहते हैं? जबकि बुजुर्गों का अनुभव ना सिर्फ हमारे परिवार के लिए बेहद मददगार साबित हो सकता है बल्कि वो एक सार्थक समाज के निर्माण में बड़ी भूमिका भी निभा सकते हैं।

बुजुर्गों के साथ संवाद में चूक के कितने भयावह परिणाम हो सकते हैं, इसका एहसास होते-होते कई बार बड़ी देर हो जाती है।  गुड़गांव से अर्थ सेवियर फाउंडेशन की टीम बुजुर्गों की जिंदगी से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर बात करेगी।

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