मिनी संसद में पढ़े-लिखे लोग करेंगे गांव का फ़ैसला

प्रियंका यादव

हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है। यहां जनता के सभी अधिकार संविधान से मिलते हैं और उसे पूरा करने का दारोमदार जनप्रतिनिधियों को है। लिहाजा अगर उनके पढ़े लिखे होने की  शर्तें लागू की जाएं तो ये एक बेहतर कदम ही माना जाएगा।

हरियाणा में अब बदलाव की बयार बह चली है और ये बदलाव जमीन से शुरू हो रहा है। मसलन सरपंच के चुनाव में अब कोई भी अनपढ़ चुनाव नहीं लड़ पाएगा । सरपंच चुनाव के लिए साक्षर होना जरूरी है । हरियाणा सरकार के इस फ़ैसले पर देश की सर्वोच्च संस्था ने भी मुहर लगा दी है। हरियाणा में पंचायत चुनाव के लिए जो नये नियम बनाए गए हैं उसके  मुताबिक उम्मीदवार का साक्षर होना जरूरी है। इसके अलावा भी तमाम शर्तें रखी गई हैं।

हरियाणा पंचायत चुनाव के नये नियम

चुनाव लड़ने से पहले इसे समझ लें

बिजली और बैंक बिल से मतलब ये है कि उम्मीदवार डिफॉल्टर न हो और उसके ऊपर कोई बिजली या फिर बैंक का अतिरिक्त बकाया न हो, मसलन समय पर किस्त अदायगी करता रहा हो। इसके अलावा साफ-सुधरी छवि वाले ही चुनाव लड़ने के योग्य होंगे। अगर किसी के ऊपर कोई आपराधिक केस चल रहा हो और लेकिन चार्जशीट दायर हो चुकी है तो वो पंचायत चुनाव लड़ने के योग्य नहीं होगा। यहां फैसला या सज़ा की शर्त नहीं रखी गई है।

 हरियाणा सरकार की ओर से पंचायत चुनाव को लेकर बनाया गया नया नियम सही है, नये कानून से किसी के भी मौलिक अधिकारों का हनन नहीं होगा – सुप्रीम कोर्ट

सरकार की सुप्रीम कोर्ट में दलील

समझ गए आप

हरियाणा में लोकसभा की कुल 10 सीटें हैं जिसमें 4 उम्मीदवार अनपढ़ बताए गए हैं । यानी संसद में हरियाणा का प्रतिनिधित्व करने वाले वाले 40 फ़ीसदी सांसद अनपढ़ हैं । वहीं पिछले पंचायत चुनाव में जीतने वाले कुल 6 हज़ार 75 सरपंचों में एक हज़ार अनपढ़ थे जबकि 58 हज़ार 608 पंचों में कुल 20 हज़ार अनपढ़ विजयी हुए थे ।

हरियाणा में साक्षरता दर के आंकड़े

आंकड़े बहुत कुछ कह रहे हैं

इन आंकड़ों पर नज़र डालने के बाद साफ है कि ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की करीब 48 फ़ीसदी आबादी पंचायत चुनाव से वंचित रह जाएगी। एक बात और गौर करने वाली है हरियाणा वही राज्य है जहां से एक भी महिला उम्मीदवार 16वीं लोकसभा में जीतकर नहीं पहुंच सकी है।

सर्वोच्च अदालत के फ़ैसले से हरियाणा में पंचायत चुनाव का रास्ता साफ हो गया है, जिसका कार्यकाल जुलाई में ही खत्म हो चुका है। हरियाणा में नए नियम से पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही दूसरे राज्यों में ऐसे ही नियमों को लेकर उम्मीदें भी जग गई हैं।


 

PRIYANKA PROFILE-1

प्रियंका यादव,  तन दिल्ली में भले हो लेकिन मन तो गांव ही बसता है । जब कभी घूमने का मौका मिलता है तो गांव पहली पसंद होती है।