एपी यादव

चुनाव प्रचार करते अनुरंजन झा।
चुनाव प्रचार करते अनुरंजन झा।

बिहार की चुनावी चासनी में हर कोई डूबा है। बस इंतजार है तो 8 नवंबर का जब इस चासनी में पककर बिहार का भविष्य बाहर निकलेगा। चौथे चरण के लिए रविवार को वोटिंग हो रही है और आखिरी दौर के लिए 5 नवंबर को मतदान होगा। ऐसे में मर्यादा तोड़ चुकी नेताओं की जुबानी जंग अब सीमाओं को तोड़ने लगी है। चुनाव बिहार का हो रहा है बात पाकिस्तान की होने लगी है। विकास का रोना रोने वाले सियासतदान अब मजहब और पड़ोसी मुल्क में दीवाली का डर दिखा रहे हैं। फिर भी कुछ ऐसे लोग हैं जो सिर्फ और सिर्फ विकास के नाम पर मतदान की वकालत कर रहे हैं। ये वे लोग हैं जो कभी मीडिया में सुर्खियां बनाया करते थे। हम बात कर रहे हैं मीडिया के उन धुरंधरों की जो इन दिनों न्यूज़ रूम से निकलकर बिहार की सियासी जमीन पर अपनी जड़ें जमाने की जुगत में जुटे हैं। इनमें अनुरंजन झा सरीखे दबंग और अनुभवी पत्रकार हैं तो कभी अनुरंजन झा के जूनियर रहे मोहम्मद शम्स शाहनवाज अपनी किस्मत आजमाने निकले हैं। इसके अलावा प्रसून पंकज जैसे जोशीले युवा और तेज तर्रार पत्रकार बिहार के बदलाव के लिए चुनावी अखाड़े में ताल ठोंक रहे हैं।

युवाओं के साथ केवटी में कमाल करने का इरादा रखते हैं प्रसून।
युवाओं के साथ केवटी में कमाल करने का इरादा रखते हैं प्रसून।

एबीपी न्यूज, न्यूज़ नेशन समेत तमाम मीडिया संस्थानों से एक दशक तक जुड़े रहे प्रसून पंकज केवटी विधानसभा सीट से बीएसपी के टिकट पर किस्मत आजमा रहे हैं। हालांकि बिहार में बीएसपी का जनाधार बहुत ज्यादा नहीं हैं लेकिन प्रसून को उम्मीद है कि उनका हाथी जाति के दलदल को पारकर विरोधियों को पटखनी जरूर देगा। प्रसून माइक और रैलियों की बजाय डोर टू डोर कैंपेन में जुटे हैं। प्रसून जिस गली से गुजरते हैं वहां एक ही नारा सुनाई पड़ता है ‘’केवटी को नेता नहीं बेटा चाहिए’’। इसके पीछे एक वजह भी है पिछले कई बरस से केवटी में जिस भी दल के उम्मीदवार जीते हैं वो एयरलिफ्ट कर लाए गए हैं। केवटी सीट पिछली बार बीजेपी का खाते में गई थी हालांकि तब जेडीयू के साथ मिलकर बीजेपी मैदान में थी। जबकि इस बार जेडीयू आरजेडी के साथ मिलकर मैदान में है और कांग्रेस भी इस महागठबंधन में शरीक है। महागठबंधन की ओर से ये सीट आरजेडी को मिली है और उसने फातमी को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि बीजेपी ने अपने पुराने विधायक अशोक यादव पर ही भरोसा जताया है। प्रसून की किस्मत का फैसला 5 नवंबर को ईवीएम में बंद होगा।

anuranjan jha
अनुरंजन झा, निर्दलीय, सुगौली सीट

मीडिया में दो दशक तक सक्रिय भूमिका निभाने वाले अनुरंजन झा बतौर निर्दलीय पूर्वी चंपारण की सुगौली सीट से अपने भविष्य की स्क्रिप्ट लिखने के लिए तैयार हैं। अनुरंजन झा मीडिया जगत में एक जाना पहचाना नाम है। वो इंडियन एक्सप्रेस से लेकर आज तक जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े रहे हैं। हालांकि इन दिनों वेबपोर्टल के जरिए अपनी बेबाक राय देश के सामने रखते रहे हैं। लेकिन अब वो राजनेता बनने की राह पर हैं। निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी अखाड़े में कूदने के सवाल पर वो कहते हैं कि ‘’हर दल में दलदल है, इसलिए वो निर्दल हैं’’ उनका नारा है- अब तो बस एक ही सपना है, सुगौली का हर इंसान अपना है।

वहीं मोहम्मद शम्स मुलायम सिंह की साइकिल पर सवार होकर बिहार की जनता का दिल जीतने निकले 

मोहम्मद शम्स, प्रत्याशी, समाजवादी पार्टी
मोहम्मद शम्स, प्रत्याशी, समाजवादी पार्टी

हैं। शम्स सीतामढ़ी की परिहार सीट से अपना दमखम दिखा रहे हैं। शम्स दुष्यंत की चंद लाइन बोलते हुए परिहार की जनता से कहते हैं ‘’हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए’’। परिहार की गलियों में कड़ी मेहनत कर रहे शख्स की जुबान पर एक की नारा है- विकास, विकास और सिर्फ विकास। जिसकी छाप उनके नारे में भी झलकती है- आज मैं सिर्फ वादा करने नहीं, उसे पूरा करने आया हूं। परिहार सीट 2010 से पहले सोनबरसा नाम से जानी जाती थी। जिसने कर्पूरी ठाकुर सरीखे जननायक को सेवा करने का मौका दिया था। कर्पूरी ठाकुर के अलावा यहां से चार बार यादव, 6 बार वैश्य और दो बार अल्पसंख्यक उम्मीदवार को जीत मिली है। बीजेपी के राम नरेश यादव मौजूदा विधायक हैं और इस बार भी बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं। आबादी के लिहाज से यादव यहां तीसरे नंबर पर हैं जबकि वैश्य की जनसंख्या सबसे ज्यादा है। अल्पसंख्यक दूसरे नंबर हैं। साइकिल पर सवार शम्स यादव वोट बैंक में सेंध लगाने के साथ अल्पसंख्यकों का कितना दिल जीत पाते हैं ये 1 नवंबर को ईवीएम में बंद हो जाएगा।

खैर जाति और धर्म के दलदल में फंस चुकी बिहार की चुनावी जमीन पर मीडिया के इन रणबांकुरों की जय होगी या पराजय, फैसला बिहार की जनता को करना है।


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