राम, दशरथ, रामायण
चित्र- रवि वर्मा

पुष्य मित्र

देश में कभी राम को लेकर वाकयुद्ध चलता है तो कभी भारत माता के नाम पर महाभारत, लेकिन ऐसे लोगों को ना तो राम से मतलब होता है और ना ही मां भारती से उन्हें तो बस अपनी सियासत चमकाने से मतलब है, इसके लिए उन्हें राम और भारत माता तो बस एक साधन मात्र हैं । ऐसे लोगों के लिए पटना के रहने वाले रामेश्वर से सीख लेने की जरूरत है, जो बिना किसी हो हल्ला के राम धुन में रमे हुए हैं और इसमें उनके आसपास रहने वालों का भी भरपूर सहयोग हासिल है । इसके लिए ना कोई मजहबी बंधन है और ना कोई भेदभाव । बस जरूरी है तो रामधुन ।

पटना के नौबतपुर में रहने वाले रामेश्वर यादव ने अखंड अष्टयाम का प्रण लिया है । वो भी दो, चार दिन के लिए नहीं बल्लि आजीवन अखंड अष्टायाम का संकल्प किया है । उनका प्रण है कि वे जब तक सांसें चलेगी अष्टयाम चलता रहेगा । जिन लोगों ने कभी अष्टयाम का आयोजन करवाया है वे इस प्रण की कठिनाईयों को समझते होंगे ।

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रामधुन में रमे रामेश्वर और उनके साथी

लगातार बिना रुके हरिनाम संकीर्तन चलता रहे यह सुनिश्चित करना कोई आसान काम नहीं। कीर्तन करने वालों की टोली हद से हद दो घंटे में थक जाती है। फिर दूसरा बैच आता है। इस तरह रिले होता रहता है।

अजवां में यह अष्टयाम पिछले साल सावन से इसी तरह चल रहा है। और आगे भी कम से कम 12 साल चलना है, जितने का संकल्प लेकर रामेश्वर यादव ने इसकी शुरुआत की है। हालाँकि उनका कहना है कि 12 साल पूरे होने पर फिर अगले 12 साल का संकल्प लेंगे। वे जब तक जीवित रहेंगे तब तक यह चलता रहेगा। उनके मंझले बेटे ने तो कह दिया है, पिता के बाद भी वे इसे जारी रखेंगे। इस चक्कर में आयोजक की रातों की नींद गायब हो गयी है। वे ठीक से खाते पीते भी नहीं हैं। हर वक़्त दिमाग अटका रहता है कि कीर्तन रुके नहीं। सोते वक़्त भी उनके दिमाग में हरे राम हरे कृष्ण का रिकॉर्ड बजता रहता है।

गांव के लोगों का उन्हें भरपूर सहयोग मिल रहा है। लोग टोलियाँ बांध कर आते हैं और घंटे दो घंटे कीर्तन करके जाते हैं। कई लोगों ने तो समय तय कर लिया है। इसमें रात 12 बजे से 2 बजे और 2 बजे से 4 बजे जैसे ऑड टाइम में आने वाले लोग भी हैं। हाँ, अगर किसी वजह से लोग नहीं आ पाए तो रामेश्वर खुद बैठ जाते हैं।

रोचक यह है कि 61 साल के रामेश्वर अम्बेडकरवादी हैं और समता सैनिक दल के पदाधिकारी रह चुके हैं। जीवन भर दलितों-पिछड़ों की लड़ाई लड़ी और अंत काल में राम धुन को जीवन का लक्ष्य बना लिया है।                                                                    (साभार- प्रभात खबर)


पुष्यमित्र। पिछले डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। गांवों में बदलाव और उनसे जुड़े मुद्दों पर आपकी पैनी नज़र रहती है। जवाहर नवोदय विद्यालय से स्कूली शिक्षा। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता का अध्ययन। व्यावहारिक अनुभव कई पत्र-पत्रिकाओं के साथ जुड़ कर बटोरा। संप्रति- प्रभात खबर में वरिष्ठ संपादकीय सहयोगी। आप इनसे 09771927097 पर संपर्क कर सकते हैं।