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शिरीष खरे

साल 2014 में अकेले मध्य-प्रदेश के किसानों ने 88 हजार ट्रैक्टर खरीदे थे। तब सूबे में 32 प्रतिशत की ग्रोथ-रेट से ट्रैक्टर खरीदे गए थे। यह ग्रोथ-रेट देश के किसी भी राज्य की तुलना में सबसे ज्यादा थी। तब सूबे में औसतन 250 से ज्यादा ट्रैक्टर खरीदे जा रहे थे। 2006 से 2014 के बीच विभिन्न कंपनियों द्वारा मध्य प्रदेश में कुल दो लाख 92 हजार ट्रैक्टर बेचे गए थे। तब एमपी के बाद राजस्थान, हरियाणा और उत्तर-प्रदेश में सबसे ज्यादा ट्रैक्टर बेचे गए थे। मगर बीते दो सालों के दौरान यहां ट्रैक्टरों की ब्रिकी में एक तिहाई से भी ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है । बीते साल प्रदेश में करीब 50 हजार ट्रैक्टर ही बिके। जाहिर है कि ट्रैक्टर ब्रिकी के मामले में नए रिकार्ड की ओर अग्रसर इस राज्य में पहले के मुकाबले प्रतिदिन करीब 100 ट्रैक्टर से भी कम बिक रहे हैं। मध्य-प्रदेश में ट्रैक्टरों की ब्रिकी को देखते हुए राजधानी भोपाल के पास स्थित औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप और इंदौर के नजदीक देवास में देश-विदेश की कई ट्रैक्टर कंपनियां प्लांट खोलने की तैयारी कर रही थीं।

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2014 में कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने हरियाणा के करनाल में कृषि वैज्ञानिकों के सामने मध्य-प्रदेश में बिक रहे ट्रैक्टरों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार का नतीजा बताते हुए एक स्पेशल प्रेजेंटेशन भी दिया था, मगर अब स्थिति उसके ठीक उलट है। प्रदेश के कृषि विभाग के कृषि इंजीनियर अनिल पोरवाल बताते हैं, “गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में उद्योग अधिक लग रहे हैं। दूसरी तरफ, सूखे से मध्य-प्रदेश भी अछूता नहीं रहा है, फिर भी इस कृषि प्रधान राज्य में खेती की संभावनाओं का सबसे अच्छा विस्तार हुआ है। यहीं वजह है कि आज भी यहां बड़ी संख्या में ट्रैक्टर बिक रहे हैं.” मगर हकीकत यह है कि ट्रैक्टर राज्य के कुछ इलाकों में ही खरीदे जा रहे हैं। देखा जाए तो सूबे के बुंदेलखंड रीजन में भंयकर सूखा पड़ा है, लेकिन प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र के होशंगाबाद और नरसिंहपुर जिले में थोड़े बहुत ट्रैक्टर खरीदे जा रहे हैं। होशंगाबाद जैसे जिलों के किसानों में गेहूं काटने के बाद तीसरी फसल का प्रचलन बढ़ा है। नरसिंहपुर जिले में 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ना बोया जाने लगा है। यह प्रदेश के कुल गन्ना क्षेत्र का 50 प्रतिशत क्षेत्र है. इसके अलावा रीवा, अशोकनगर, रायसेन, विदिशा, सीहोर और पन्ना जिलों में सिंचाई का रकबा बढ़ा है ।

मध्य प्रदेश में सिंचाई का कुल रकबा बढ़कर 37 प्रतिशत हो गया है। IMG_20160320_140757विभाग के कृषि इंजीनियर अनिल पोरवाल का कहना है, “किसान एक साल में दो से तीन फसलें लेना चाहते हैं। उनके लिए खेती के कामों को करने के लिए ट्रैक्टर सबसे उपयुक्त साधन बन रहा है। इसमें तरह-तरह के यंत्र लगाकर सभी तरह के काम किए जा सकते हैं। इसलिए इस साल मानसून अच्छा रहा तो ट्रैक्टर बिक्री की दर में फिर से उछाल आ सकती है।” वहीं, एक ट्रैक्टर कंपनी विक्रेता ने बताया कि मानसून यदि सामान्य रहा तो 2017 में यहां ट्रैक्टर बिक्री की दर में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है।
दूसरी तरफ, कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि अच्छी मार्केटिंग के चलते भी बड़ी संख्या में ट्रैक्टर बेच दिए गए हैं। इस दौरान किसानों को अंधाधुंध कर्ज बांटे गए और उन्हें भी ट्रैक्टर दिलवा दिए गए जिनके पास इन्हें खरीदने की हैसियत नहीं थीं। इनमें ज्यादातर किसान आज कर्ज पटाने की स्थिति में नहीं हैं। कुछ जानकारों का यह मानना है कि जितने ट्रैक्टर बिकने थे बिक गए, अब मध्य प्रदेश के बाजार में भी पंजाब और हरियाणा की तरह ट्रैक्टर बिक्री की दर में गिरावट आने लगी है और आने वाले समय में यह हालत होगी की राज्य में प्रतिदिन 100 ट्रैक्टर भी नहीं बिकेंगे।


shirish khareशिरीष खरे। स्वभाव में सामाजिक बदलाव की चेतना लिए शिरीष लंबे समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। दैनिक भास्कर और तहलका जैसे बैनरों के तले कई शानदार रिपोर्ट के लिए आपको सम्मानित भी किया जा चुका है। संप्रति राजस्थान पत्रिका के लिए रायपुर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उनसे shirish2410@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

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