गांव से अम्मा डांटेगी LIVE

पीएम मोदी डिजिटल इंडिया मिशन को मजबूत करने में जुटी महिला का सम्मान करते हुए। स्रोत-पीआईबी, नई दिल्ली- 1 जुलाई 2015
पीएम मोदी डिजिटल इंडिया मिशन को मजबूत करने में जुटी महिला का सम्मान करते हुए। स्रोत-पीआईबी, नई दिल्ली- 1 जुलाई 2015

 

”वक़्त बहुत तेजी से बदल चुका है। पहले हम लोग कभी किसी परिवार में जाते थे और छोटे बच्‍चे से बात करते थे तो बच्‍चा क्‍या करता था? अगर आपका चश्‍मा है तो खींच के ले जाता था या आपकी जेब में पेन है तो उसको उठाता था। लेकिन आज आप मार्क करना कि वह न चश्‍मे को हाथ लगाता है न पेन को हाथ लगाता है वह आपका मोबाइल फोन छीनता है। मोबाइल फोन हाथ में आते ही ठीक से पकड़ता है, आप मार्क करना.. और अपना शुरू कर देता है और अगर, जैसा चाहे वैसा ऑपरेशन नहीं होता तो रोने लगता है यानी बाकी वह कुछ समझे या ना समझे डिजिटल ताक़त को समझता है।” – प्रधानमंत्री मोदी

डिजिटल इंडिया शब्द सुनने में जितना अच्छा लग रहा है, उतना ही कारगर साबित होगा क्या? बतौर पीएम मोदी घर बैठे आपकी सभी समस्याओं का हल हो जाएगा। सवाल ये कि ये सपना रहेगा या हकीकत में भी बदलेगा।

सरकार की योजना के मुताबिक अगले एक साल में देश की करीब ढाई लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉड बैंड से जोड़ा जाएगा जबकि अभी महज 30 हज़ार पंचायतों तक ही ब्रॉड बैंड की पहुंच हो पाई है। एक जुलाई को देश के पहले डिजिटल गांव का तमगा लेकर घूम रहे हरिद्वार के पंजनहेडी गांव के लोगों को उस वक़्त मायूस होना पड़ा जब पीएम से दो चार सवाल करने का मौका मिलने की बजाय महज माननीय प्रधानमंत्री का भाषण सुनकर संतोष करना पड़ गया। कमोबेश यही हाल इंदौर के उन गांवों का भी रहा जिन्हें डिजिटल इंडिया से जोड़ने का दावा सरकार कर रही है। योजना की लॉन्चिंग के वक्त अगर मुकम्मल तैयारी नहीं रही तो आगे सरकार और अफ़सर कितना संजीदा होंगे इसको लेकर थोड़ा संशय उठना लाजिमी है।

डिजिटल इंडिया का प्रोजेक्ट अपनी जगह, लेकिन कई बार मेरे जेहन में सवाल ये उठता है कि बिना बुनियादी सुविधाओं के ऐसी बातें महज नारेबाजी और जुमलेबाजी तक सिमट कर न रह जाएं। गांव-देहात में आज भी तमाम ऐसे इलाके हैं, जहां बच्चों के पढ़ने के लिए एक अदद स्कूल तक नहीं है। बीमार पड़ने पर प्राथमिक उपचार की कोई सुविधा नहीं है। आज भी महिलाएं खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। बिजली पानी की बात तो छोड़ ही दीजिए। ऐसा नहीं है कि सरकारों ने गांवों की इन समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया या फिर धन की कोई कमी है। कमी है तो हमारे सिस्टम में, सरकारों के काम करने के तरीके में, अधिकारियों की नीयत में।

डिजिटल इंडिया की बड़ी बातें

डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट में साढ़े चार लाख करोड़ का निवेश होगा

18 लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान

ई गवर्नेंस को मोबाइल गवर्नेंस तक बदलने का वादा

बच्चों को बस्ते के बोझ से मुक्ति का वादा

इलेक्ट्रॉनिक गुड्स का देश में उत्पादन का लक्ष्य

हेल्थ केयर में डिजिटल इंडिया को बनाएंगे मददगार

किसानों तक रियल टाइम इंफॉर्मेशन पहुंचाने का लक्ष्य

लोगों की सुरक्षा ज़रूरतों को पूरा करने का मिशन

ई-बिजनेस को मिलेगा बढ़ावा

वित्तीय इनक्लुजन में मिलेगी मदद

 

दिल्ली में रहते हुए अपने गांव के बारे में सोचते हुए कई बार रोमांच जरूर होता है। वो क्या दिन होंगे जब गांव की काकी, ताई, दादी और अम्मा मोबाइल, लैपटॉप के जरिए सीधे पीएम मोदी से दो चार बातें करेंगी? कभी कभार मुझ जैसी बहुओं को गांव से डिजिटल इंडिया का डर भी सताएगा… पता नहीं कब अम्मा लाइव चैट में दो चार डांट पिला दें… फिर भी मोदीजी मुझे उस दिन का इंतज़ार है और रहेगा।

PRIYANKA PROFILE-1प्रियंका यादव,  तन दिल्ली में भले हो लेकिन मन तो गांव ही बसता है जी।

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