अजय कुमार की फेसबुक वॉल से कोसी की तस्वीर
अजय कुमार की फेसबुक वॉल से कोसी की तस्वीर

सत्येंद्र कुमार

यूपी में पंचायत और बिहार में विधानसभा चुनाव जारी है। हर घर बिजली, सड़क, सिंचाई, शिक्षा की बात हर पार्टी के एजेंडे में है लेकिन किसानों की मूल समस्या पर किसी का ध्यान नहीं है। मॉनसून की मार की वजह से किसानों के बुरे दिन का दौर चल रहा है लेकिन नेताओं को इसकी फिक्र नहीं। उन्हें वोट चाहिए ताकि उनके अच्छे दिन आ जाएं। पहले ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी, बाढ़ ने फसलों को बर्बाद कर दिया और अब कम बारिश की वजह से बची हुई धान की फसल सूख गई। ओलावृष्टि से हजारों हेक्टेयर धान की फसल बर्बाद हो गई और जो धान की फसल बची थी वो कमजोर मॉनसून की वजह से सूखकर मुआर हो गई।

 

पवन मिश्रा की फेसबुक वॉल से देवरिया की तस्वीर
पवन मिश्रा की फेसबुक वॉल से देवरिया की तस्वीर

मोदी सरकार ने हर खेत पानी का वादा किया। अखिलेश सरकार किसानों की सबसे बड़ी हितैषी होने का दावा करती है। दोनों के वादों और दावों की पोल ये तस्वीर खोल रही है। ये तस्वीर यूपी के देवरिया जिले के मंगराइच गांव की है। बारिश कम होने से किसान मुआर काटने के लिए मजबूर हैं। हालात ये है कि इसे जानवर भी नहीं खा रहे। देवरिया जिले से कई नदियां होकर गुजरती हैं लेकिन सरकारों ने कभी नदियों के पानी का सही इस्तेमाल करने का प्रयास नहीं किया। नहर और बिजली की व्यवस्था होती तो शायद ये नौबत नहीं आती। रवि के बाद खरीफ की फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने भूखमरी की समस्या आ गई है।

किसानों के सामने समस्या ये है कि अगर अब भी बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं हुई तो गेहूं की फसल फिर खराब हो जाएगी। नवंबर में गेहूं की बुआई होती है लेकिन खेतों में नमी की कमी की वजह से किसान चिंतित हैं। जिनके पास वाटर पंप है वो किसी तरह महंगा डीजल इस्तेमाल कर खेतों में पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। वहीं गरीब किसान भगवान और सरकार भरोसे बैठे हैं।

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सत्येंद्र कुमार यादव फिलहाल इंडिया टीवी में कार्यरत हैं और गांव अब भी उनके दिल में धड़कता है। उनसे मोबाइल- 9560206805 पर संपर्क किया जा सकता है।


किसानों की व्यथा कथा का एक और हिस्सा

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