miss tanakpur

सत्येंद्र कुमार

बड़े पर्द के बाद 22 अक्टूबर, शाम 8 बजे STAR GOLD HD पर फिर ‘मिस टनकपुर’ मिली और मुझे गांव की ओर लेकर चली गई। ठीक उसी तरह से जिस तरह ‘वेल डन अब्बा’ बावड़ी चोरी की कहानी दिखाकर ले गई थी। ग्राम प्रधानों की चोरी, स्थानीय नेताओं के झूठ और अपराधियों की मदद करने वाली पुलिस का जिक्र फिर किया। वो जब भी मिलती है गांव के अंधविश्वास, कुरीतियों और हमारे भ्रष्ट तंत्र, नेता-पुलिस के भ्रष्ट गठजोड़ पर चोट करती है। वो बताती है कि तुम्हारे पास भले ही कंप्यूटर है लेकिन सोच में ज्यादा बदलाव और तेजी नहीं। वो कहती है समाज भले ही चांद पर पहुंच जाएगा लेकिन गांव की चांदनी पर कालिख तब तक पोतता रहेगा जब तक सोच नहीं बदलेगी।

इस फिल्म को दोबारा देखते समय लग रहा था कि ये सब हमारे आस-पास हो रहा है। महाराष्ट्र की 5555एक अजीबोगरीब घटना याद आ रही थी। 80 साल की एक बुजुर्ग महिला को ‘गंदी गालियां’ देने के आरोप में एक तोते को समन भेजकर पुलिस थाने तलब किया गया। महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिला के राजुरा में हुए इस अजीबोगरीब वाकये में 80 साल की जानाबाई सखारकर ने अपने सौतेले बेटे सुरेश पर आरोप लगाया कि उसने अपने तोते ‘हरियल’ को गाली देना सिखाया है। पुलिस को उन्होंने बताया कि जब भी वह उसके घर के पास से गुजरती है तो तोता उन्हें गाली देता है। गुस्साई महिला के आरोप की पुष्टि के लिए पुलिस ने जानाबाई, उसके सौतेले बेटे सुरेश और तोता (हरियल) को थाने बुलाया। घंटों तक तोते को थाने में रखा गया। इंतज़ार किया गया कि तोता कभी तो गाली देगा लेकिन तोते ने पुलिस के सामने एक भी गाली नहीं बकी।

तोता पता नहीं क्यों मौन है, किसको गरिया रहा है? फिलहाल, ‘मिस टनकपुर’ की कहानी पुरानी है लेकिन उसका सच आज भी जिंदा है। आज भी पुलिस थानों में 1मतंग और गांव में ग्राम प्रधान सुआलाल जिंदा हैं। “मर्दानी ताकत” बढ़ाने के नाम पर झोला छाप डाक्टर और मनोकामना पूर्ण कराने के नाम पर जादू मंत्र का पाखंड करने वाले पंडित हैं। आज भी झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा में गरीबों को झूठे मामलों में फंसा कर प्रताड़ित किया जा रहा है। पुलिस और नेताओं के भ्रष्ट गठजोड़ ईमानदार आदमी को जीने नहीं दे रहे। एक दशक पहले का दर्द आज भी है। पहले भी गरीब और ईमानदार लोग प्रताड़ित होते थे और आज भी।

पत्रकार से फिल्म निर्देशक बने विनोद कापड़ी ने इस फिल्म को संवारा है। फिल्म गांव के दबंग और एक दबे कुचले, गरीब और कमजोर नौजवान की कहानी है। आज भी ग्रामीण इलाकों में दबंग लोगों की नजर में गरीबों की कोई कीमत और इज्ज़त नहीं होती। फिल्म में एक ऐसे ग्राम प्रधान की कहानी है, जो अपनी ‘इज्ज़त’ की खातिर किसी भी हद तक चला जाता है। ग्राम प्रधान सुआलाल (अन्नू कपूर) अपनी उम्र से काफी छोटी लड़की माया (हृषिता भट्ट) से शादी तो कर लेता है लेकिन उसकी ‘सुख-सुविधाओं’ का ध्यान नहीं रख पाता। बूढ़े पति से परेशान माया इलेक्ट्रीशियन अर्जुन प्रसाद की ओर आकर्षित होती है और उससे प्यार कर बैठती है। इसकी जानकारी जब ग्राम प्रधान सुआलाल को हुई तो उसने अपने लठैत भीमा (रवि किशन) के साथ मिलकर अर्जुन (राहुल बग्गा) की जमकर पिटाई की और भैंस से रेप के आरोप में उसे जेल में डलवा दिया।

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हद तो तब हो गई जब गवाही के लिए भैंस (मिस टनकपुर) को कोर्ट में बुलाया गया। फिल्म में गांव के गंवईपन और हास्य का इस्तेमाल करते हुए विनोद कापड़ी ने समाज की संकुचित मानसिकता और भेदभाव पर करारा प्रहार किया और हल्के अंदाज में गंभीर विषय को पर्दे पर उतारा।

दूसरी बार मिस टनकपुर के साथ सुग्गा भी मेरे दिमाग में बहुत कुछ बतिया रहा था। का जाने गरियाये रहा हो? तोता बाबू को थाने में हाज़िरी लगानी पड़ी और मिस टनकपुर में भैंस को गवाही के लिए कोर्ट में बुलाया गया। गांवों में ऐसे मसाले मिलते रहेंगे, लेकिन कोई कापड़ी ही होगा जो भैंसिया को हीरोइन बनाने का माद्दा दिखाएगा।

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सत्येंद्र कुमार यादव फिलहाल इंडिया टीवी में कार्यरत हैं । उनसे मोबाइल- 9560206805 पर संपर्क किया जा सकता है।


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