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सोनपुर मेले में बस एक महीने के लिए बनता है, चिड़िया बाज़ार थाना।
सोनपुर मेले में बस एक महीने के लिए बनता है, चिड़िया बाज़ार थाना। फोटो-पुष्यमित्र

यह बात सबको मालूम है कि सोनपुर मेला में चोरी-छुपके पक्षियों का अवैध व्यापार होता है। राज्य सरकार का वन एवं पर्यावरण विभाग भी लगातार इसके खिलाफ अभियान चलाता रहता है। पिछले साल दिल्ली के एक स्वयंसेवी संस्था की एक्टिविस्ट महिला ने इसकी शिकायत की थी, जिस पर सारण जिला प्रशासन की ओर से मुकदमा दायर कर सख्त कार्रवाई की गयी थी। मगर क्या आपको मालूम है कि यहां एक थाना लगता है, जिसका नाम चिड़िया बाजार थाना है?

अरविंद मिश्र, वन्यजीवों और परिंदों के संरक्षण से जुड़े कई अभियानों में सक्रिय।
अरविंद मिश्र, वन्यजीवों और परिंदों के संरक्षण से जुड़े कई अभियानों में सक्रिय।

दरअसल, चिड़िया बाजार थाना, सोनपुर मेले में लगने वाले छह अस्थायी थानों में से एक है, जो सिर्फ एक महीने के लिए बनाया जाता है। इसका चिड़ियों के व्यापार से कुछ लेना-देना नहीं है। मगर जहां सरकार परिंदों के व्यापार को प्रतिबंधित करने की दिशा में बढ़ रही है, एक थाने का नाम चिड़िया बाजार होना काफी अजीब लगता है। इंडियन बर्ड कंजरवेशन नेटवर्क के स्टेट कोऑर्डिनेटर अरविंद मिश्र कहते हैं-वन्य प्राणि अधिनियम के मुताबिक किसी भी भारतीय मूल की चिड़िया वह चाहे कौआ ही क्यों न हो उसकी खरीद-बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। केवल विदेशी मूल के उन पक्षियों को ही खरीदा और बेचा जा सकता है, जिनका उत्पादन पालतू पक्षियों के रूप में किया जाता है, जैसे -लव बर्ड, फिंज, कॉकटिल आदि। विदेशी मूल के प्रवासी पक्षियों को भी खरीदा या बेचा नहीं जा सकता। ऐसी गतिविधि में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है।

सोनपुर में तोता-मैना के खरीदार पुराने हैं।
सोनपुर में तोता-मैना के खरीदार पुराने हैं।-फोटो पुष्यमित्र

रोचक तथ्य यह है कि सोनपुर मेले में लगे इस थाने के ठीक बगल में बिहार सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग का बोर्ड लगा है, जिसमें विस्तार से बताया गया है कि किस-किस तरह की पक्षियों का व्यापार करने पर क्या-क्या सजा हो सकती है। थाने में मौजूद पुलिस कर्मी कहते हैं, थाने का नाम बहुत पहले से ही रखा जाता रहा है। चिड़िया बाजार के अलावा थियेटर थाना और मीना बाजार थाना भी मेले में हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या कभी इस नाम को बदले जाने की भी बात हुई, वे असमंजस में पड़ जाते हैं। वे कहते हैं कि चिड़ियों के व्यापार को रोकने की जिम्मेदारी भी उनकी नहीं है। यह वन एवं पर्यावरण विभाग के लोगों का काम है। हां, उनके पास कोई शिकायत आये तभी वे कार्रवाई कर सकते हैं।

SONPUR MELA-1कड़े नियमों और जागरुकता के बावजूद मेले में चिड़ियों को खरीदा और बेचा जाना जारी है। चिड़िया बाज़ार के मालिक रामजी सिंह, जिनका इस मेले के चिड़ियों के व्यापार पर पीढ़ियों से एकाधिकार है। कहते हैं कि वे सिर्फ विदेशी मूल के लव बर्ड, बजरी, फिंज, जावा और कॉकटिल चिड़ियों को ही बेचते हैं। मगर सच्चाई यह है कि तोता, हंस और बतख जैसे पक्षी उनके बाजार में धड़ल्ले से बिक रहे हैं। तसवीरें गवाह हैं कि पूरे मेले में ऐसे बीसियों लोग मिल जाते हैं, जिन्होंने तोता खरीदा होता है।  वन प्रमंडल पदाधिकारी, सारण ने फोन पर हुई बात में कहा कि अगर ऐसा हो रहा है तो वे जांच कर कर उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। सबसे जरूरी काम है, लोगों को ये बताना कि परिंदों को खरीदना या बेचना नैतिक रूप से गलत है और क़ानूनन अपराध भी।  इसके लिए प्रतीकात्मक रूप से ही सही, चिड़िया बाजार थाना का नाम बदल कर कुछ और रखा जाना चाहिये।

(पुष्यमित्र की ये रिपोर्ट साभार- प्रभात खबर से)

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पुष्यमित्र। पिछले डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। गांवों में बदलाव और उनसे जुड़े मुद्दों पर आपकी पैनी नज़र रहती है। जवाहर नवोदय विद्यालय से स्कूली शिक्षा। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता का अध्ययन। व्यावहारिक अनुभव कई पत्र-पत्रिकाओं के साथ जुड़ कर बटोरा। संप्रति- प्रभात खबर में वरिष्ठ संपादकीय सहयोगी। आप इनसे 09771927097 पर संपर्क कर सकते हैं।


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