महीनों का काम घंटों में… कमाल है डीएम साहब!

185596_145201448877133_277064_nअरुण यादव

अगर आपके जिले के आलाधिकारी आपकी समस्या का निपटारा घर बैठे कर दें, तो कैसा लगेगा ? जरा सोचिए आप अपने घर पर हों और अधिकारी आपको फोन करके कहें कि साहब आपकी क्या समस्या है तो शायद आपको यकीन नहीं होगा, लेकिन ये सच है और ये सब हो रहा है उत्तर प्रदेश में। वो उत्तर प्रदेश जहां की शासन-व्यवस्था पर हमेशा सवाल उठता रहा है। अगर आपके जिले का कोई कर्मचारी या अधिकारी अपने काम में ढिलाई बरत रहा है या फिर आपसे किसी काम के बदले रिश्वत की डिमांड करता है तो आपको अपना काम कराने के लिए रिश्वत देने की कतई ज़रूरत नहीं। बस आपको इतना करना है कि एक स्मार्ट फोन उठाइए, आपके पास न हो तो किसी पड़ोसी या दोस्त का फोन लीजिए और अपने जिले के डीएम को व्हाट्स एप पर एक मैसेज कीजिए क्योंकि अब डीएम साहब ऑन लाइन हैं और आपकी शिकायत पर उनकी नज़र है।

जिलाधिकारी जौनपुर
भानुचंद गोस्वामी, जिलाधिकारी जौनपुर

ये सब मैं यूं ही नहीं कह रहा बल्कि ऑन लाइन शिकायत सिस्टम को पूरी तरह परखने के बाद कह रहा हूं। यहां मैं जौनपुर जिले के डीएम भानुचंद गोस्वामी की सक्रियता का उदाहरण आपको बताता हूं। वो इन दिनों फेसबुक और व्हाट्स एप पर पूरी तरह सक्रिय हैं। पिछले करीब 4 महीने से मेरा ड्राइविंग लाइंसेंस जौनपुर RTO ऑफिस में पड़ा था । 19 फरवरी 2016 को मैंने अपना लाइसेंस RTO ऑफिस में अपग्रेड कराया। ऑफिस के क्लर्क ने मुझे बताया कि तीन दिन बाद आप अपना लाइसेंस आकर कलेक्ट कर लें या फिर आपके पते पर भेज दिया जाएगा। तीन दिन बाद जब मैं ऑफिस गया तो मुझे बताया गया कि आपका डीएल आपके पते पर पोस्ट कर दिया गया है। जौनपुर शहर से मेरे घर की दूरी करीब 18 किलोमीटर है यानी अगर कोई पोस्ट आज किया जाए तो उसे 2-3 दिन में तो जरूर ही पहुंच जाना चाहिए। पूरे 5 दिन तक इंतजार के बाद मैं दिल्ली लौट गया, लेकिन मेरा लाइसेंस घर नहीं पहुंचा ।

हर दिन मैं घर फोन करके अपडेट लेता रहा। इस बीच मैंने जौनपुर के आरटीओ से भी फोन पर बात की, उन्होंने मेरी बात सुनी और लाइसेंस लेने के लिए किसी को भेजने के लिए कहा। मैंने अगले दिन अपने भाई को RTO ऑफिस भेजा लेकिन हुआ कुछ नहीं। बाबुओं के चक्कर काट कर वो लौट आया। कई दिन तक उसे बुलाया गया लेकिन लाइसेंस नहीं मिल पाया। ना ही लाइसेंस जिस पोस्टल एजेंसी से भेजा गया था, उसका कोई रिकॉर्ड मुहैया कराया गया। पूछने पर सिर्फ इतना कहा जाता कि अभी डाक विभाग से नंबर आया नहीं है। अब जौनपुर का ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट कौन से डाक से डीएल पोस्ट करता है, ये तो वही जाने लेकिन चार महीने होने को आ गए लेकिन मेरा लाइसेंस नहीं आया था।

c9b75228-f058-4282-9b74-065e7bd8b05aइस बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने सूबे के सभी जिलाधिकारियों को व्हाट्स एप पर ऑन लाइन होने का निर्देश दिया और इसके लिए बाकायदा सभी जिलों के डीएम का नंबर भी जारी किया। लिहाजा, मैंने सोचा चलो एक बार डीएम साहब को ही मैसेज भेजकर देखता हूं। सच में डीएम साहब ऑन लाइन हैं या महज नंबर ही बांट दिए गए। 31 मई को मैंने रात करीब पौने 9 बजे जिलाधिकारी भानुचंद गोस्वामी को व्हाट्स एप नंबर 9454417578 पर मैसेज किया और विस्तार से अपनी समस्या लिख दी। फिर क्या था बमुश्किल 20 मिनट ही बीते होंगे,( डीएम साहब का कोई मैसेज तो नहीं आया) मेरे मोबाइल पर जौनपुर के आरटीओ लक्ष्मणजी का कॉल आ गया और मुझसे पूछा गया बताइए आपकी क्या समस्या है ? मैं हैरान था, यकीन नहीं हो रहा था इतना फास्ट रिएक्शन? खैर मन ही मन डीएम साहब को शुक्रिया करता हुआ आरटीओ साहब को एक बार फिर आपबीती सुनाई और अपने लाइसेंस का डिटेल बताया । RTO साहब ने फोन काटा और करीब 10 मिनट बाद दोबारा फोन आया और मुझसे कहा गया कि कल सुबह किसी को भेजकर अपना लाइसेंस कलेक्ट करवा लीजिए।  यही नहीं देरी के लिए दलील भी दी गई कि बाबुओं की लापरवाही से ऐसा हु । इसके लिए उन्होंने खेद भी जताया। अगले दिन मेरा लाइसेंस तो मिल गया लेकिन उसपर जन्मतिथि  (25-04-1982 की जगह 25-11-1982) गलत प्रिंट हो गया है, जिसे ठीक कराना बाकी है। Untitled

खैर चार महीने बाद लाइसेंस पाकर मैं खुश था और डीएम जौनपुर के लिए शुक्रिया के बोल निकल रहे थे। मैंने डीएम साहब को मैसेज करके धन्यवाद ज्ञापित कर दिया। इस घटना से ये तो साफ है कि अगर डीएम जौनपुर की तरह सभी जिलों के डीएम व्हाट्स एप और सोशल मीडिया पर शिकायतों को लेकर दिलचस्पी दिखाएंगे तो बहुत जल्द ही उत्तर प्रदेश की तस्वीर और छवि दोनों बदलनी शुरू हो जाएगी ।जौनपुर के डीएम भानुचंद गोस्वामी युवा हैं और वो जनसरोकार से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरुक भी रहते हैं। जब से वो जौनपुर में आए हैं जिले की एक अलग छवि देखने को मिल रही है। भानुचंद गोस्वामी फेसबुक पर भी सिटिजन आई के नाम पर पेज बनाकर जनशिकायतें सुनने का काम कर रहे हैं । जरूरत है जौनपुर के डीएम की तरह सूबे के दूसरे जिलाधिकारी भी सक्रियता हों (हो सकता है कुछ हों भी), ताकि लोग ये कह सकें, यूपी बदल रहा है।


अरुण यादव। उत्तरप्रदेश के जौनपुर के निवासी। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र। इन दिनों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय।


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3 thoughts on “महीनों का काम घंटों में… कमाल है डीएम साहब!

  1. बहुत खूब ! ये नयी बयार चली है ! आशा है कदम धीमे नहीं पड़ेंगे !

  2. Sir! Namskar , mera naam Ramesh Kumar hai . mere Pitaji apne bhai par Mukdma kar diya hai kyoki mere chacha Ji Pitaji ki kuchh praparti hadap liye hai Jo unki maa ki hai. hadap karke apne beto ke naam kar diya hai. To kya mukadama karke yo praparti wapas mil Santa hai….

    1. इंसाफ़ के लिए अदालत की चौखट तक जाने में कोई गुरेज नहीं है। लेकिन पारिवारिक और सामाजिक मामले परिवार और समाज में ही सुलझाने की कोशिश हो तो ज्यादा बेहतर।

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