bhakti sharma

सत्येंद्र कुमार यादव

सपनों ने उड़ान भरी और वो पहुंच गई अमेरिका, लेकिन पिता का दिल बेटी की कामयाबी विदेश में नहीं, अपने गांव में देखना चाहता था। अपनी माटी में उसकी कामयाबी की खुशबू महसूस करना चहता था। एक रोज पिता ने कहा- बेटी घर आओ, अपने गांव, देश और समाज के लिए कुछ करो। फिर क्या था बेटी बापू की पुकार पर देश लौट आई और सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुट गई। इसी बीच पंचायत चुनाव ने उसे अपनी ओर आकर्षित किया। पिता ने कहा- बेटी गांव से ही देश का विकास शुरू करो। गांव सुधरेगा तो देश सुधरेगा। अमेरिका से आई बिटिया पंचायत चुनाव में उतर गई और चुनाव जीतकर सरपंच बन गई। देखा था आईएएस अधिकारी बनने का सपना लेकिन बन गई सरपंच। ये कहानी 26 साल की भक्ति शर्मा की है।

bhakti sharma2भक्ति शर्मा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 13 किलोमीटर दूर बसे बरखेड़ी गांव की सरपंच हैं। कार्यभार संभाले अभी दस महीने ही हुए हैं। इतने कम समय में भक्ति शर्मा ने गांव में कई काम किए। दस महीने के अंदर गांव में सवा करोड़ रुपए खर्च करके नई सड़कें बनवाईं, शौचालयों का निर्माण कराया। भक्ति शर्मा के बारे में मुझे सोशल मीडिया से जानकारी मिली। भोपाल के पत्रकार नितिन दुबे ने उनके बारे में जिक्र किया था। मेरी उत्सुकता बढ़ी और मैंने फोन पर सरपंच भक्ति शर्मा से बात की।

भक्ति शर्मा ने बताया कि, जब उन्होंने गांव के सरपंच के तौर पर कार्यभार संभाला तो देखा कि गांव में कई तरह की परेशानियां है। ना सड़कें हैं, ना पानी की सुविधा, बिजली का तो पता ही नहीं। दस घरों को छोड़कर किसी के घर में शौचालय तक नहीं था। आंगनबडी की हालत भी दयनीय थी। गांव के स्कूल सिर्फ आठवीं तक थे। भक्ति शर्मा ने गांव में बदलाव के लिए पहले छोटी-छोटी समस्याओं को दूर करने का फ़ैसला किया। उन्होंने कहा- ‘‘मैंने सबसे पहले सड़क, शौचालय और पानी पर ध्यान दिया। दस महीने में गांव की सड़कें बनवाई। करीब 80 घरों में शौचालय का निर्माण करवाया। पांचों गांव में पक्की सड़कें, घर-घर में शौचालय के अलावा नल-जल योजना के तहत भी काम चल रहा है। गांव में बिजली बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया है, हालांकि इस पर काम अभी शुरुआती दौर में है।”

bhakti sharma1बरखेड़ी पंचायत में पांच गांव आते हैं- बरखेड़ी, डोब, भदभदा, रुसल्ली और किरत नगर। इन पांचों गांव के बीच सड़क निर्माण पर काफी पैसे खर्च होते हैं। गांव में कई सड़कें बन चुकी हैं फिर भी अभी बहुत काम बाकी है। भक्ति शर्मा ने बताया कि ” सड़क के लिए 55 लाख रुपए मंजूर हुए हैं। वहीं पानी की टंकी लगाने और गांव में पानी पहुंचाने के लिए 73 लाख रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। मेरा मकसद गांव के लोगों को वो सभी सुविधाएं दिलाना है, जिनकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत है। सड़क, पानी के बाद सबसे बड़ी परेशानी बिजली की है। इसी समस्या को दूर करने के लिए हमने कुछ प्राइवेट कंपनियों को सोलर प्लांट लगाने का प्रस्ताव भेजा है।

bhakti sharma1भक्ति शर्मा की अगुवाई में सोलर प्लांट के लिए शुरुआती काम शुरू हो गया है। सोलर एनर्जी क्यों, इस पर उन्होंने कहा- ”मैंने सरकार के भरोसे ना रहकर खुद बिजली पैदा कर सप्लाई देने की योजना बनाई है। इस काम के लिए निजी कंपनियों से संपर्क कर एक मेगावाट बिजली सोलर प्लांट से तैयार की जाएगी। अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले दो-तीन साल में पांचों गांव खुद की बिजली से रौशन हो जाएंगे।” भक्ति शर्मा गांव के विकास में अपने स्किल का पूरा इस्तेमाल कर रही हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को भी आगे बढ़ा रही हैं। जिन घरों में बेटी पैदा होती है, उन्हें वो यथा मुमकिन आर्थिक मदद भी देती हैं। भक्ति शर्मा एक साल में गांव को स्वच्छ भारत अभियान के तहत निर्मल गांव घोषित करना चाहती हैं।

bhakti sharmaभक्ति अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ आगे बढ़ रही हैं। उनके इस काम में माता-पिता, भाई और दादा-दादी का पूरा सहयोग है। पिता हर मौके पर उनके साथ रहते हैं। उन्हीं के प्रयासों से भक्ति ने समाजसेवा की ओर रूख किया। ” फिलहाल मैं राजनीति नहीं, सोशल सर्विस कर रही हूं। मैं राजनीतिक रूप से किसी से नहीं जुड़ी। अभी तक मेरी फैमली ने मुझे मोटिवेट किया लेकिन मैं राजनीति में आगे बढ़ना चाहती हूं। मेरा मानना है कि जब तक हाथ में शक्ति नहीं होती तब तक कोई कुछ कर नहीं पाता। जब मैं गांव में आई तो हर चीज का अभाव था। सर्व शिक्षा अभियान के तहत चार स्कूल मिले हैं लेकिन उनकी हालत काफी खराब है। कोई काम नहीं हुआ है। हाथ में पावर है तो स्कूलों की हालत सुधारने में जुटी हूं। शक्ति नहीं होती तो इतना कुछ नहीं कर पाती।

bhakti sharma3बातों ही बातों में मैंने भक्ति शर्मा से डिजिटल विलेज के बारे में चर्चा की। डिजिटल विलेज  के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि- ”मैं अभी गांव की छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा कर रही हूं ताकि बाद में इन चीजों में उलझना ना पड़े। जब सड़क, पानी, बिजली और शौचालय की समस्या दूर कर लूंगी, उसके बाद हाईटेक चीजों पर तेजी से काम शुरू करूंगी। अगर मैं प्राथमिक चीजों को भी नहीं कर पाई तो फिर लोगों को कैसे कन्विंस करूंगी ? अगर मैं अभी डिजिटल गांव पर काम करूं तो लोग नाराज हो जाएंगे। आने वाले दो साल में गांव की पूरी सड़कें पक्की हो जाएंगी। इसके बाद जो भी मैं गांव वालों को समझाऊंगी, बताऊंगी वो स्वीकार करेंगे।’

26 साल की महिला सरपंच भक्ति शर्मा अमेरिका में नौकरी करती थीं। वहां से लौट आईं लेकिन पढ़ाई का सिलसिला अब भी जारी है। लंदन में मैनेजमेंट कोर्स के लिए सौ फ़ीसदी स्कॉलरशिप मिली है। अगले साल वो 21 दिनों के लिए लंदन जाएंगी। देश और दुनिया से अनुभव बटोर कर एक गांव को संवारने की भक्ति की ‘भक्ति’ की जितनी तारीफ की जाए कम है। कहते हैं भक्ति में बड़ी ताकत होती है और ये ताकत महसूस कर रहे हैं बरखेड़ा के लोग।satyendra profile image


सत्येंद्र कुमार यादव, फिलहाल इंडिया टीवी में कार्यरत हैं । माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता के पूर्व छात्र। सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता से आप लोगों को हैरान करते हैं। उनसे मोबाइल- 9560206805 पर संपर्क किया जा सकता है।


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